बिहार चुनाव से पहले चिराग पासवान का बड़ा बयान, बोले– नीतीश ही बनेंगे मुख्यमंत्री
Bihar Politics: बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी हलचल भी तेज़ होती जा रही है। महागठबंधन हो या एनडीए, दोनों खेमों में सीट बंटवारे को लेकर खींचतान और बयानबाज़ी लगातार सुर्खियाँ बटोर रही है। इसी बीच लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने ऐसा बयान दिया है, जिसने राजनीतिक सरगर्मी और बढ़ा दी है।
चिराग के चाचा का दावा और बढ़ा विवाद
हाल ही में लोजपा (रा) के जमुई सांसद और चिराग पासवान के चाचा अरुण भारती ने कहा था कि पार्टी 43 से 137 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और कार्यकर्ता चाहते हैं कि चिराग पासवान ही मुख्यमंत्री बनें। इस बयान ने सियासी चर्चाओं को हवा दी।
चिराग ने साफ किया अपना स्टैंड
अब खुद चिराग पासवान सामने आए और उन्होंने साफ कहा कि:
• एनडीए इस बार 225 से ज़्यादा सीटें जीतेगा।
• मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ही होंगे, और उनकी ही ताजपोशी होगी।
• वह खुद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में नहीं हैं।
चिराग ने यह भी कहा कि कार्यकर्ता भले ही उन्हें मुख्यमंत्री देखना चाहते हों, लेकिन यह केवल एक पार्टी की चाहत से संभव नहीं है। इसके लिए पूरे गठबंधन की सहमति ज़रूरी है।
सीट बंटवारे पर लोजपा (रा) का रुख
सीट बंटवारे को लेकर चिराग ने कहा कि उनकी प्राथमिकता ज्यादा सीटों की संख्या नहीं, बल्कि “क्वालिटी सीटें” हैं। यानी, पार्टी ऐसी सीटें चाहती है, जहाँ जीतने की संभावना मज़बूत हो ताकि स्ट्राइक रेट बेहतर रहे।
महागठबंधन पर हमला
चिराग पासवान ने महागठबंधन पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा:
• “राहुल गांधी बिहार आते हैं, लेकिन मुख्यमंत्री पद पर अब तक सहमति नहीं बन पाई। महागठबंधन अंदरूनी खींचतान से जूझ रहा है और चुनाव के दौरान यह विवाद और बढ़ेगा।”
• उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि महागठबंधन के नेताओं को एनडीए की चिंता छोड़कर पहले अपनी फिक्र करनी चाहिए।
एनडीए में भी सीटों पर रस्साकशी
उधर, एनडीए खेमे में भी सबकुछ सहज नहीं है।
• हम पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी 15 से 20 सीटों की मांग कर रहे हैं और चेतावनी दे चुके हैं कि अगर यह मांग नहीं मानी गई तो उनकी पार्टी 100 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ सकती है।
• वहीं लोजपा (रा) के नेताओं की बयानबाज़ी भी गठबंधन के लिए चुनौती बनी हुई है।
बड़ा सियासी संदेश
चिराग पासवान का यह बयान जहाँ नीतीश कुमार के नेतृत्व को मज़बूती देता है, वहीं एनडीए के भीतर चल रही खींचतान को भी सामने लाता है। अब देखना दिलचस्प होगा कि एनडीए व महागठबंधन दोनों खेमों में सीट बंटवारे की यह जंग किस तरह सुलझती है और किसे इसका फायदा या नुकसान मिलता है।