बिहार चुनाव से पहले बढ़ा विवाद: जन सुराज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, महिलाओं को ₹10,000 ट्रांसफर पर उठाए सवाल
जन सुराज पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने और मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू रहने के बावजूद राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत नए लाभार्थियों को जोड़कर सीधे भुगतान किया। पार्टी का कहना है कि इससे मतदाताओं को प्रभावित करने की कोशिश हुई, जो संविधान के कई प्रावधानों के खिलाफ है।
पार्टी का दावा है कि चुनाव के दौरान करीब 25 से 35 लाख महिलाओं को 10,000 रुपये का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) किया गया। याचिका में कहा गया है कि इस तरह का भुगतान जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत “भ्रष्ट आचरण” की श्रेणी में आ सकता है।
याचिका में एक और आरोप लगाया गया है कि दो चरणों के मतदान के दौरान जीविका स्वयं सहायता समूह से जुड़ी करीब 1.8 लाख महिलाओं को पोलिंग बूथ पर तैनात किया गया, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। जन सुराज पार्टी ने इसे प्रशासनिक मशीनरी के दुरुपयोग का मामला बताया है।
पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि बिहार में दोबारा विधानसभा चुनाव कराए जाएं, क्योंकि मौजूदा चुनाव प्रक्रिया स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं मानी जा सकती। साथ ही कोर्ट से यह भी आग्रह किया गया है कि चुनाव आयोग को मुफ्त योजनाओं और DBT स्कीम्स को लेकर सख्त गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया जाए।
याचिका में सुझाव दिया गया है कि चुनाव से पहले सरकारों के लिए कम से कम छह महीने का “कूलिंग पीरियड” तय हो, ताकि वोट से ठीक पहले लोक-लुभावन योजनाओं की घोषणा और भुगतान पर रोक लग सके। मामला अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद आगे बढ़ेगा।