दिल्ली फ्लैट, महंगी एंबुलेंस और मेडिकल कॉलेज… पीके ने खोला मंगल पांडेय का ‘भ्रष्टाचार कनेक्शन’
Patna: जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने एक बार फिर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और बीजेपी नेता मंगल पांडेय पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शुक्रवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पीके ने कहा कि कोरोना काल के दौरान मंगल पांडेय ने पत्नी के नाम पर दिल्ली में फ्लैट खरीदा और इसके लिए बीजेपी के ही नेता दिलीप जायसवाल से पैसे लिए।
पीके के मुताबिक, यह फ्लैट 86 लाख रुपये में खरीदा गया था, जिसमें से 25 लाख रुपये सीधे दिलीप जायसवाल ने मंगल पांडेय के पिता के खाते में भेजे, जो बाद में मंत्री की पत्नी के खाते में ट्रांसफर हुए। आरोप है कि इसके बदले जायसवाल के मेडिकल कॉलेज को सरकार ने ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा दे दिया, जबकि 20 साल से यह कॉलेज बीएन मंडल यूनिवर्सिटी के जरिए डिग्री दे रहा था।
एंबुलेंस खरीद में भी गड़बड़ी का आरोप
प्रशांत किशोर ने एंबुलेंस खरीद में भी बड़ा घोटाला होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि 2022 में बिहार सरकार ने 1000 एंबुलेंस का टेंडर निकाला था। टाइप-C मॉडल की कीमत तब 19.58 लाख रुपये थी, लेकिन 2025 में वही एंबुलेंस 27.47 लाख रुपये में खरीदी गई। यानी तीन साल में एक एंबुलेंस की कीमत करीब 8 लाख रुपये बढ़ गई।
पीके ने सवाल उठाया कि जब ओडिशा में यही एंबुलेंस 16 लाख और उत्तर प्रदेश में 12 लाख में खरीदी जा रही है, तो बिहार में इतनी महंगी क्यों? उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर में शर्त थी कि कंपनी के हर जिले में सर्विस सेंटर होना चाहिए, लेकिन जिसे ठेका मिला, उसके कुछ ही जिलों में सर्विस सेंटर हैं। इसके बावजूद कंपनी पर कार्रवाई करने के बजाय सरकार ने उससे और एंबुलेंस खरीद ली।
टाटा मोटर्स को बाहर कर फोर्स मोटर्स को ठेका
पीके ने दावा किया कि टाटा मोटर्स को टेंडर से तकनीकी आधार पर बाहर कर दिया गया, क्योंकि उनके एंबुलेंस में ड्राइवर केबिन और मरीज वाले हिस्से – दोनों में एसी था। जबकि टेंडर में शर्त थी कि एसी सिर्फ मरीज वाले हिस्से में हो। उन्होंने कहा कि यह बहाना बनाकर टाटा को हटा दिया गया और ठेका उस कंपनी को दे दिया गया, जिसके एंबुलेंस में ड्राइवर केबिन में एसी नहीं था।
आयुष्मान योजना में भी पक्षपात का आरोप
प्रशांत किशोर ने यह भी आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत सबसे ज्यादा बिलिंग दिलीप जायसवाल के अस्पताल से हुई, और इस योजना के बिहार प्रमुख पहले मंगल पांडेय के निजी सचिव रह चुके हैं।
पीके ने मांग की कि मंगल पांडेय और जल्द ही मुख्य सचिव बनने वाले प्रत्यय अमृत को इन आरोपों पर सार्वजनिक तौर पर सफाई देनी चाहिए।