प्रशासनिक कारणों से नगर निकायों में सशक्त स्थायी समिति चुनाव की समय-सीमा बढ़ी, अब 25 अप्रैल तक होगा निर्वाचन...
Patna: राज्य के नगर निकायों में सशक्त स्थायी समिति के गठन को लेकर चल रही निर्वाचन प्रक्रिया की अंतिम तिथि बढ़ा दी गई है. अब यह चुनाव 25 अप्रैल तक कराया जा सकेगा. सूत्रों के अनुसार, कई नगर निकायों में तकनीकी व प्रशासनिक कारणों से प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पा रही थी. इसे ध्यान में रखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने यह निर्णय लिया है, ताकि सभी नगर निकाय नियमों के अनुसार समिति का गठन कर सकें.
उप मुख्यमंत्री सह नगर विकास एवं आवास मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि राज्य के सभी नगर निकायों में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के निर्वाचन को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. विभाग ने पूर्व में निर्धारित अंतिम तिथि में संशोधन करते हुए निर्वाचन की समय-सीमा को बढ़ाने की घोषणा की है, ताकि यह प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संपन्न हो सके.
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासनिक एवं प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं, साथ ही विभिन्न स्तरों पर बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के दृष्टिकोण से विभाग ने पुनर्विचार करते हुए इस निर्वाचन प्रक्रिया की अंतिम तिथि को 20.04.2026 से बढ़ाकर अब 25.04.2026 तक करने का निर्णय लिया है. इस निर्णय का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी नगर निकायों में निर्वाचन प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष एवं व्यवस्थित रूप से संपन्न हो तथा किसी भी स्तर पर कोई बाधा उत्पन्न न हो.
विजय कुमार सिन्हा ने बताया कि पूर्व में विभागीय अधिसूचना संख्या 1187, दिनांक 02.04.2026 के आलोक में राज्य के प्रत्येक नगर निगम, नगर परिषद एवं नगर पंचायत में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों के निर्वाचन हेतु दिनांक 15.04.2026 से 20.04.2026 तक की अवधि निर्धारित की गई थी. इस अवधि के दौरान सभी नगर निकायों में निर्वाचन प्रक्रिया संपन्न कराए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था.
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने जिलों के अंतर्गत आने वाले प्रत्येक नगर निकाय में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का निर्वाचन दिनांक 15 अप्रैल 2026 से 25 अप्रैल 2026 के बीच अनिवार्य रूप से संपन्न कराना सुनिश्चित करें.
साथ ही, उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि निर्वाचन प्रक्रिया के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखते हुए पारदर्शिता, निष्पक्षता एवं निर्धारित नियमों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस संबंध में पूर्व में निर्गत पत्र के अन्य सभी दिशा-निर्देश यथावत प्रभावी रहेंगे और उनका कड़ाई से अनुपालन किया जाना आवश्यक होगा, ताकि पूरी प्रक्रिया सुचारु रूप से पूर्ण हो सके.