पूर्व BCCI अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को SC से मिली राहत, क्रिकेट बोर्ड का पदाधिकारी बनने में अब कोई रोक नहीं
Bihar political news: पूर्व केंद्रीय मंत्री और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कोर्ट ने उन्हें बीसीसीआई की गतिविधियों में शामिल होने की इजाजत दे दी है. 2017 में कोर्ट ने ठाकुर को बीसीसीआई अध्यक्ष के पद से बर्खास्त किया था. सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश के बाद अब उनके दोबारा क्रिकेट बोर्ड पदाधिकारी बनने में कोई अदालती अड़चन नहीं है.
क्रिकेट बोर्ड के कामकाज में सुधार पर सुझाव देने के लिए 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने एक कमेटी का गठन किया था. इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस आर एम लोढ़ा को सौंपी गई थी. 2016 में कमेटी ने अपनी सिफारिशें कोर्ट को सौंपी. कोर्ट ने उन्हें लागू करने का निर्देश दिया, लेकिन इसे लेकर बीसीसीआई का रवैया टालमटोल भरा रहा. 2 जनवरी 2017 को कोर्ट ने सिफारिशों को लागू करने में अड़चन डालने के लिए बीसीसीआई अध्यक्ष अनुराग ठाकुर और सचिव अजय शिर्के को उनके पद से हटा दिया था.
सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आईसीसी को लिखी अनुराग ठाकुर की एक चिट्ठी पर गहरी नाराजगी जताई थी. इस चिट्ठी में ठाकुर ने आईसीसी से दरख्वास्त की थी कि वो बीसीसीआई में सीएजी के प्रतिनिधि को रखे जाने का विरोध करे. चूंकि बोर्ड में ऑडिटर को रखने की सिफारिश भी लोढ़ा कमेटी की थी. ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने इसे सीधे अदालत के साथ धोखाधड़ी माना था. कोर्ट ने ठाकुर को अवमानना का नोटिस भी जारी किया था.
उसी साल मिल गई थी माफी
हालांकि, 14 जुलाई 2017 को अनुराग ठाकुर को सुप्रीम कोर्ट से माफी मिल गई. ठाकुर पर अदालत की अवमानना और कोर्ट को गलत जानकारी देने का आरोप था. वह व्यक्तिगत रूप कोर्ट में पेश हुए और दोनों आरोपों के लिए बिना शर्त माफी मांगी. इसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया था.
अनुराग ठाकुर की तरफ से वरिष्ठ वकील पी एस पटवालिया ने कोर्ट से अनुरोध किया कि अब उन्हें क्रिकेट बोर्ड से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने दिया जाए. चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि आदेश को 9 साल हो चुके हैं. कोर्ट का इरादा यह नहीं था कि अनुराग ठाकुर को क्रिकेट बोर्ड के कामकाज से हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया जाए इसलिए वह क्रिकेट बोर्ड के नियमों के मुताबिक उसकी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं.