‘मैं समझ रहा हूं… कई घरों में आज खाना नहीं बना होगा’- कुशवाहा की चुप्पी से ज़्यादा बोल गया उनका दर्द
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मद्देनज़र लंबे मंथन और सियासी खींचतान के बाद आखिरकार एनडीए में सीटों का बंटवारा तय हो गया है। दिल्ली में हुई बीजेपी की केंद्रीय चुनाव समिति की मैराथन बैठक के बाद सीटों पर सहमति बन गई है, हालांकि इस बंटवारे ने सहयोगी दलों के भीतर असंतोष की चिंगारी भी भड़का दी है।
सूत्रों के अनुसार, एनडीए में सबसे बड़ी हिस्सेदारी बीजेपी और जेडीयू के बीच बराबर बांटी गई है। दोनों दल 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। वहीं, छोटे सहयोगियों को उनकी राजनीतिक हैसियत के मुताबिक समायोजित किया गया है-चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 29 सीटें, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) और जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 6-6 सीटें मिली हैं।
हालांकि, यह समीकरण सबको रास नहीं आया। सबसे ज़्यादा नाराज़गी उपेंद्र कुशवाहा के खेमे में देखी जा रही है। सीट शेयरिंग के तुरंत बाद उन्होंने एक भावुक सोशल मीडिया पोस्ट कर अपने कार्यकर्ताओं से माफी मांगी और लिखा -“प्रिय मित्रों और साथियों, आप सभी से क्षमा चाहता हूं। आपके मन के अनुकूल सीटों की संख्या नहीं हो पाई। मैं समझता हूं, इस निर्णय से कई घरों में आज खाना नहीं बना होगा। लेकिन कुछ मजबूरियां ऐसी होती हैं जो बाहर से नहीं दिखतीं। आने वाला समय सब बताएगा।”
कुशवाहा के इस बयान ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। राजनीतिक गलियारों में अब यह सवाल गूंजने लगा है कि क्या वह एनडीए से अलग होने की तैयारी में हैं, या फिर यह नाराज़गी सिर्फ़ दबाव की रणनीति है?
जानकारी के मुताबिक, बीते हफ्ते दिल्ली में हुई बैठकों के दौरान भी कुशवाहा ने अपनी सीटों को लेकर नाराज़गी जताई थी। बीजेपी के कई वरिष्ठ नेता उन्हें मनाने की कोशिश में जुटे, मगर मनमुताबिक परिणाम न मिलने पर कुशवाहा ने सोशल मीडिया के ज़रिए अपनी “विवशता” जाहिर कर दी।
एनडीए खेमे के भीतर जहां बीजेपी और जेडीयू अपनी चुनावी तैयारियों में जुट गए हैं, वहीं छोटे सहयोगियों का असंतोष आने वाले दिनों में गठबंधन की एकजुटता पर असर डाल सकता है। फिलहाल, सबकी नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि “क्या उपेंद्र कुशवाहा एनडीए का हिस्सा बने रहेंगे या कोई नया रास्ता तलाशेंगे?”