वेजफेड के माध्यम से सब्जी उत्पादक किसानों को बेहतर बाजार, भंडारण और उचित मूल्य उपलब्ध कराने की पहल तेज : राम कृपाल यादव
रामकृपाल यादव ने कहा है कि राज्य के सब्जी उत्पादक किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य दिलाना, फसल की बर्बादी कम करना और उन्हें बाजार से सीधे जोड़ना सहकारिता विभाग की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। बिहार राज्य सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी फेडरेशन लिमिटेड (वेजफेड) के माध्यम से किसानों को उत्पादन से लेकर संग्रहण, प्रसंस्करण, भंडारण और विपणन तक आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध कराने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सहकारी व्यवस्था को सशक्त बनाकर किसानों को बिचौलियों पर निर्भरता कम करने, बाजार की बेहतर जानकारी प्राप्त करने और अपनी उपज का अधिक लाभकारी मूल्य हासिल करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि सब्जी उत्पादक किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखना, सुरक्षित भंडारण, समय पर बाजार तक पहुँच और प्रभावी विपणन व्यवस्था भी जरूरी है। वेजफेड के माध्यम से विकसित की जा रही आधारभूत संरचना और प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को इन सभी सुविधाओं से जोड़ने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। सहकारिता विभाग का प्रयास है कि ग्रामीण स्तर पर ही सब्जियों के संग्रहण, छंटाई, ग्रेडिंग और विपणन की बेहतर व्यवस्था विकसित हो, ताकि किसानों को उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल मिल सके।
इस योजना का कार्यान्वयन त्रिस्तरीय सहकारी संरचना के माध्यम से किया जा रहा है। इसके अंतर्गत प्रखंड स्तर पर प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियाँ (PVCS), क्षेत्रीय स्तर पर सब्जी प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी संघ तथा राज्य स्तर पर वेजफेड कार्य कर रहा है। वर्तमान में राज्य में आठ क्षेत्रीय सब्जी संघ—हरित, तिरहुत, मिथिला, मगध, भागलपुर, मुंगेर, सारण एवं शाहाबाद—कार्यरत संरचना का हिस्सा हैं। प्रखंड स्तर पर 534 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियाँ निबंधित हैं, जिनसे 1,18,000 से अधिक सब्जी उत्पादक किसान जुड़े हुए हैं।
सब्जी समितियों में बन रही आधुनिक आधारभूत संरचना
किसानों को स्थानीय स्तर पर सब्जियों के संग्रहण, सफाई, छंटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और भंडारण की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पूर्व से स्वीकृत 114 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों में प्रति इकाई 1.14 करोड़ रुपये की लागत से आधारभूत संरचना विकसित की जा रही है। इनमें 25 इकाइयों का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि 82 इकाइयों में निर्माण कार्य जारी है। इन केंद्रों पर ग्रामीण मंडी, सब्जी संग्रहण केंद्र, माप-तौल, वाशिंग एवं क्लीनिंग, सॉर्टिंग-ग्रेडिंग, पैकेजिंग शेड, गोदाम और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने की योजना है।
इसके अतिरिक्त जुलाई 2026 में 50 नए प्रखंडों की प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों में प्रति इकाई 1.12 करोड़ रुपये की लागत से आधारभूत संरचना निर्माण की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इन केंद्रों पर 10 मीट्रिक टन क्षमता का कोल्ड स्टोरेज, 20 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम, खरीद-बिक्री, ग्रेडिंग, सफाई एवं माप-तौल के लिए शेड, बीज-उर्वरक एवं सब्जी बिक्री केंद्र, बहुउद्देशीय कार्य क्षेत्र और कार्यालय जैसी सुविधाएँ विकसित की जाएँगी। इस योजना के लिए 25 समितियों में भूमि उपलब्ध हो चुकी है।
350 पंचायत स्तरीय सब्जी संग्रहण केंद्रों की स्थापना
ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुँचाने में होने वाली कठिनाइयों और परिवहन लागत को कम करने के उद्देश्य से 350 पंचायत स्तरीय सब्जी संग्रहण केंद्र स्थापित किए जाने हैं। प्रथम चरण में उन 114 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों से संबंधित पंचायतों का चयन किया जा रहा है, जहाँ आधारभूत संरचना स्वीकृत है या संचालित है। अब तक 102 पंचायतों में भूमि उपलब्ध हो चुकी है। इन केंद्रों पर सब्जियों का संग्रहण, छंटाई और तौल जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होने से किसानों को स्थानीय स्तर पर ही अपनी उपज एकत्रित करने और विपणन के लिए भेजने में सहूलियत होगी।