पैक्स को आत्मनिर्भर एवं बहुउद्देशीय व्यावसायिक इकाई बनाने की दिशा में सहकारिता विभाग की पहल, दक्षिण बिहार के 90 पैक्स अध्यक्षों एवं प्रबंधकों को दिया गया प्रशिक्षण

राजस्व सृजन, उद्यमशीलता विकास और सरकारी योजनाओं से जुड़कर पैक्स की आय बढ़ाने पर जोर
 

बिहार में प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) को पारंपरिक गतिविधियों से आगे बढ़ाकर आत्मनिर्भर, व्यावसायिक एवं बहुउद्देशीय संस्थाओं के रूप में विकसित करने की दिशा में सहकारिता विभाग द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में दिनांक 26 अक्टूबर, 2026 को दीप नारायण सिंह क्षेत्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान, पटना में दक्षिण बिहार के 90 पैक्स अध्यक्षों एवं प्रबंधकों के लिए राजस्व सृजन एवं उद्यमशीलता विकास विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण-सह-कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य पैक्स की आय के नए स्रोत विकसित करना, उनकी व्यावसायिक क्षमता को सुदृढ़ करना तथा उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए सक्षम बनाना है।

कार्यशाला के माध्यम से पैक्सों को केवल खाद्यान्न अधिप्राप्ति एवं पारंपरिक कृषि गतिविधियों तक सीमित न रहकर स्थानीय आवश्यकताओं और बाजार की मांग के अनुरूप नए व्यवसाय अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। प्रशिक्षण सत्रों में कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के राज्य प्रभारी तथा राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC), इफको (IFFCO) एवं GT टीम के प्रतिनिधियों ने पैक्स के माध्यम से राजस्व सृजन, उद्यमशीलता विकास और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जानकारी दी। कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पैक्सों की सफल कार्यप्रणालियों एवं नवाचारों को अन्य सहकारी संस्थाओं तक पहुंचाना भी रहा, ताकि वे एक-दूसरे के अनुभवों से सीखकर अपनी कार्यक्षमता और आय में वृद्धि कर सकें।

प्रशिक्षण के दौरान पैक्सों को विभिन्न गैर-कृषि एवं सेवा आधारित उद्यमों की संभावनाओं से अवगत कराया गया। इनमें पत्तल एवं प्लेट निर्माण, स्लीपर्स निर्माण, सिलाई इकाई की स्थापना, सोलर एलईडी बल्ब की असेंबली एवं बिक्री, जन औषधि केंद्र का संचालन तथा स्थानीय मांग के अनुरूप अन्य स्वरोजगारपरक गतिविधियां शामिल हैं। इन उद्यमों के माध्यम से पैक्स ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने के साथ-साथ अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला सकते हैं और स्थानीय स्तर पर आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने में योगदान दे सकते हैं।

कार्यशाला में केंद्र एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर पैक्सों की व्यावसायिक गतिविधियों को विस्तार देने पर भी विशेष जोर दिया गया। इस क्रम में सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना, खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के औपचारिकीकरण की योजना, कृषि अवसंरचना कोष, पीएम किसान समृद्धि केंद्र, पीएम-कुसुम योजना तथा जीविका के माध्यम से उपलब्ध व्यावसायिक संभावनाओं पर चर्चा की गई। इन योजनाओं से जुड़कर पैक्स भंडारण सुविधाओं के विकास, सौर ऊर्जा के उपयोग, ग्रामीण खाद्य प्रसंस्करण तथा अन्य आयपरक गतिविधियों में अपनी भागीदारी बढ़ा सकते हैं।

पैक्सों को विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत बैंक ऋण एवं सरकारी सहायता प्राप्त करने में सुविधा हो, इसके लिए उनकी वित्तीय एवं प्रबंधकीय तैयारियों पर भी विशेष ध्यान दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान पंजीकरण प्रमाणपत्र, अंकेक्षित वित्तीय विवरण, प्रबंध समिति के प्रस्ताव, विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन, भूमि एवं भवन की उपलब्धता, बैंक खाते तथा केवाईसी से संबंधित आवश्यक दस्तावेजों को व्यवस्थित एवं अद्यतन रखने के संबंध में जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य पैक्सों को परियोजनाओं की बेहतर तैयारी, वित्तीय संसाधनों तक पहुंच तथा नए उद्यमों के प्रभावी संचालन के लिए सक्षम बनाना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन संयुक्त निबंधक (अंकेक्षण) श्री कामेश्वर ठाकुर एवं दीप नारायण सिंह क्षेत्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान के निदेशक द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर NCDC, CSC एवं IFFCO की टीमों के सदस्य तथा दक्षिण बिहार के विभिन्न जिलों से आए पैक्स अध्यक्ष एवं प्रबंधक उपस्थित रहे।