क्या बदल रही है बिहार विधानसभा चुनाव की सियासी बयार, LOK POLL सर्वे में किसका पलरा भारी नीतीश कुमार या तेजश्वी यादव?
Bihar Political Desk: बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आ चुके हैं. जिस तरह बिहार का मौसम आग उगल ठीक वैसे ही चुनावी सरगर्मियां भी अब बढ़ गई हैं. शनिवार को निर्वाचन आयोग (EC) ने घोषणा की कि वह 4 और 5 अक्टूबर 2025 को बिहार का दो दिवसीय दौरा कर विधानसभा चुनाव की तैयारी की समीक्षा करेगा. यह यात्रा विशेष गहन संशोधन (SIR) पर आधारित नई मतदाता सूची के प्रकाशन के ठीक कुछ दिनों बाद हो रही है, जो 30 सितंबर को जारी होगी. अब जैसे जैसे चुनाव की तारीख पास आ रही है साथ ही साथ अब यह भी खबर सामने आ रही है की 2025 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी बयार बदलने लगी है.
आपको बता दें, हाल ही में आए एक चुनाव पूर्व सर्वे ने राज्य की राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. लोक पोल (Lok Poll) के सर्वे के अनुसार, बिहार चुनाव में आरजेडी नीत महागठबंधन (MGB) को 118 से 126 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) 105 से 114 सीटों तक सिमट सकता है.
यह सर्वे तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और उसके सहयोगियों के लिए एक बड़ा बढ़ावा माना जा रहा है, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (JDU) और बीजेपी की अगुवाई वाले NDA के लिए यह एक चेतावनी हो सकता है. इस सर्वे को देखकर सवाल उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार की तमाम चुनावी रेवड़ियां फेल हो रही हैं? आइए, इस सर्वे और बिहार की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों पर विस्तार से नजर डालते हैं.
लोक पोल के सर्वे में बताया गया है कि बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से महागठबंधन को 118 से 126 सीटें मिल सकती हैं, जबकि NDA को 105 से 114 सीटें. वहीं अन्य पार्टियों को 2 से 5 सीटें मिलने की संभावना है. वोट शेयर की बात करें तो महागठबंधन को 39% से 42% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि एनडीए को 38% से 41% वोट मिल सकते हैं. यह अंतर वैसे तो बेहद कम है, लेकिन सीटों की संख्या में महागठबंधन का बढ़त लेना तेजस्वी यादव के लिए एक बड़ा नैरेटिव सेट करता है.
नीतीश कुमार की सरकार ने पिछले कुछ महीनों में कई वेलफेयर स्कीम्स की घोषणा की है, जैसे बुजुर्ग और विधवा महिलाओं के लिए मासिक भत्ता, बेरोजगार युवाओं के लिए मासिक सहायता और 125 यूनिट मुफ्त बिजली… इन चुनावी रेवड़ियों पर राज्य का सालाना खर्च 40,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है, जो राज्य की कुल राजस्व प्राप्ति का लगभग 70% है. लोक पोल सर्वे के नतीजे इशारा करते हैं कि इन स्कीम्स का असर सीमित रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि वेलफेयर स्कीम्स लंबे समय में प्रभाव डालती हैं, लेकिन चुनाव से ठीक पहले इनकी घोषणा वोटरों को ज्यादा प्रभावित नहीं करती, खासकर जब विपक्ष नौकरी और विकास के मुद्दे पर आक्रामक हो.
बिहार की राजनीति लंबे समय से जाति, वर्ग, और क्षेत्रीय समीकरणों पर आधारित रही है. नीतीश कुमार ने 2005 से इन समीकरणों को संतुलित करके अपनी सरकार बनाई है, लेकिन 2025 के चुनाव में ये समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. लोक पोल के सर्वे में यह सामने आया है कि युवा वोटर और महिलाएं इस बार महागठबंधन की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं. राहुल गांधी की वोटर अधीकार यात्रा ने भी महागठबंधन के पक्ष में माहौल बनाया है. वहीं, NDA की ओर से बीजेपी और जेडीयू के बीच समन्वय की कमी भी वोटरों को प्रभावित कर रही है. नीतीश कुमार की बार-बार गठबंधन बदलने की रणनीति ने उनकी विश्वसनीयता को भी नुकसान पहुंचाया है. इसके उलट तेजस्वी यादव ने ‘जंगल राज’ के आरोपों का जवाब देते हुए विकास और नौकरी के एजेंडे पर फोकस किया है, जो वोटरों को आकर्षित कर रहा है.