कहलगांव विधानसभा: सदानंद सिंह की यादों के बीच पवन यादव और शुभानंद के बीच सियासी जंग की आहट

 

Patna Desk: बिहार की सियासत में कहलगांव विधानसभा सीट का जिक्र आते ही दिवंगत कांग्रेस नेता सदानंद सिंह का नाम सबसे पहले सामने आता है। करीब पांच दशक तक इस सीट पर दबदबा बनाए रखने वाले सदानंद सिंह 2021 में दुनिया से विदा हो गए। अब 2025 का विधानसभा चुनाव ऐसा पहला मौका होगा, जब यह सीट उनकी सीधी मौजूदगी के बिना लड़ी जाएगी।

सदानंद सिंह का राजनीति से गहरा रिश्ता

1969 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सदानंद सिंह ने कहलगांव से कुल 12 बार चुनाव मैदान में कदम रखा और 9 बार जीत हासिल की। 1977 की जनता पार्टी की लहर में भी उन्होंने अपनी पकड़ मजबूत रखी और जीत दर्ज की।


1985 में जब कांग्रेस ने उनका टिकट काटा तो उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़कर जीतकर अपनी लोकप्रियता का सबूत दिया। विधानसभा अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मंत्री के रूप में उन्होंने लंबी राजनीतिक यात्रा तय की।

बेटे शुभानंद मुकेश को नहीं मिली कामयाबी

2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें मैदान से उतारने के बजाय उनके बेटे शुभानंद मुकेश को प्रत्याशी बनाया। लेकिन वह भाजपा के पवन कुमार यादव से 42,893 वोटों के बड़े अंतर से हार गए। यही नहीं, यह जीत कहलगांव सीट पर अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड भी बनी। बाद में शुभानंद मुकेश जदयू में शामिल हो गए।

पहली बार भाजपा का खाता और विकास का दावा

2020 में भाजपा ने पहली बार इस सीट पर जीत दर्ज की। मौजूदा विधायक पवन यादव का कहना है कि पिछले पांच सालों में क्षेत्र में कई विकास कार्य हुए:
    •    ग्रामीण सड़कों का जाल बिछा
    •    शहर में जलापूर्ति व्यवस्था सुधरी
    •    सन्हौला और गोराडीह में स्टेडियम की स्वीकृति मिली
    •    एकचारी में रेल ओवरब्रिज का निर्माण शुरू हुआ
    •    स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार सृजन पर फोकस किया गया

विपक्ष के आरोप

वहीं, राजद नेताओं का कहना है कि मौजूदा विधायक ने वादों पर अमल नहीं किया। उनका आरोप है कि एनटीपीसी के एस डाइक से उड़ने वाली राख की समस्या जस की तस बनी रही और कटाव पीड़ितों का पुनर्वास नहीं हो सका।

बदले समीकरण और नए मुद्दे

कहलगांव विधानसभा सीट पर अब तक कांग्रेस का दबदबा रहा है। यहाँ से कांग्रेस 11 बार जीत चुकी है, जबकि जनता दल, भाजपा, जदयू, सीपीआई और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कभी-कभी सफलता पाई। इस बार सीट बंटवारे में कांग्रेस, भाजपा और जदयू—तीनों की नजरें यहाँ टिकी हैं।

आगामी चुनाव में सनोखर बाजार को प्रखंड कार्यालय बनाने की मांग, एनटीपीसी एस डाइक का मुद्दा और मेगा फूड पार्क में उद्योग लगाने की पहल अहम चुनावी मुद्दे बन सकते हैं।