कर्पूरी ठाकुर सिर्फ नेता नहीं, सामाजिक न्याय की जीवित मिसाल थे: विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार
कार्यक्रम की शुरुआत में विधानसभा अध्यक्ष ने कर्पूरी ठाकुर के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि 24 जनवरी 1924 को समस्तीपुर जिले के एक साधारण परिवार में जन्मे कर्पूरी ठाकुर ने असाधारण जीवन जिया। उन्होंने राजनीति को सत्ता का साधन नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम बनाया।
डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी कर्पूरी ठाकुर का जीवन बेहद सादा और आम लोगों जैसा रहा। उनका मानना था कि जब तक समाज के अंतिम व्यक्ति का विकास नहीं होगा, तब तक लोकतंत्र अधूरा रहेगा। यही कारण था कि उन्होंने पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों को आरक्षण देकर शिक्षा और रोजगार के रास्ते खोले। उस समय यह फैसला साहसिक माना गया, लेकिन आज वही सामाजिक समानता की मजबूत नींव बन चुका है।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत में डॉ. राम मनोहर लोहिया के बाद कर्पूरी ठाकुर सामाजिक न्याय और समतामूलक समाज के सबसे बड़े प्रणेता माने जाते हैं। उन्होंने जातिगत असमानता को उजागर करते हुए समाज को पुरस्कृत, बहिष्कृत और तिरस्कृत वर्गों में बांटकर अति-पिछड़ों की पीड़ा को सामने रखा। वे अति-पिछड़े वर्ग को “मनहीन, तनहीन और धनहीन” बताते हुए उनके अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष करते रहे।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि आज केंद्र की मोदी सरकार कर्पूरी ठाकुर के अधूरे सपनों को पूरा करने की दिशा में काम कर रही है। रोहिणी आयोग की सिफारिशें लागू होने से अति-पिछड़े वर्गों को उनका हक और अधिकार मिलने का रास्ता साफ होगा।
अपने संबोधन के अंत में डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर की कथनी और करनी में कभी फर्क नहीं रहा। वे सच्चे अर्थों में जननायक थे। उनकी 102वीं जयंती पर हम सभी को सादगी, ईमानदारी, समानता और सामाजिक न्याय के उनके आदर्शों को अपनाने का संकल्प लेना चाहिए।
इस अवसर पर मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल, मंत्री रामकृपाल यादव, विधायक संजय गुप्ता, नंदवंशी चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनंद कुमार, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक ठाकुर सहित कई जनप्रतिनिधि, समाजसेवी और बड़ी संख्या में आम लोग उपस्थित रहे।