रामलीला मैदान की रैली को फ्लॉप बताने वालों को भ्रम में रहने दीजिए, 1974 के बाद ऐसा जनसैलाब नहीं आया : मुकेश सहनी

लोकतंत्र बचाने और जनता के वोट के अधिकार की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा विपक्ष : वीआईपी संस्थापक
 

पटना, 2 नवंबर। विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक और बिहार के पूर्व मंत्री मुकेश सहनी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित विपक्ष की महारैली को सत्ता पक्ष द्वारा फ्लॉप बताए जाने पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों को रैली फ्लॉप बताना है, उन्हें बताने दीजिए। सच्चाई सबको पता है कि 1974 के बाद रामलीला मैदान में राहुल गांधी के नेतृत्व में इतना बड़ा जनसैलाब कभी नहीं आया था। जिन्हें भ्रम में जीना है, उन्हें भ्रम में रहने दीजिए।

पटना में मीडिया से बातचीत में सहनी ने कहा कि विपक्ष देश की जनता और लोकतंत्र को बचाने के लिए काम कर रहा है। यह कोई निजी काम नहीं है। देश का मिजाज क्या है और विपक्ष क्या कर रहा है, यह उसे पता है। उन्होंने कहा कि रैली को लेकर सस्पेंस बनाए रखने वालों को ऐसा करने दीजिए, लेकिन जनता की भागीदारी ने लोकतंत्र बचाने के संकल्प को स्पष्ट कर दिया है।

सहनी ने कहा कि देश में चुनाव जनता के लिए होता है। यदि पैसे के दम पर वोट और सांसद-विधायक खरीदे जाने लगेंगे, तो आम जनता की बात कौन सुनेगा? उन्होंने कहा कि यदि किसी सांसद को 100 करोड़ रुपये देकर खरीदा जाए, तो 250 सांसदों के लिए 25 हजार करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी तरह 500 करोड़ रुपये प्रति सांसद के हिसाब से भी एक लाख करोड़ रुपये में पूरे देश की राजनीति खरीदने की स्थिति बन सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिसके पास इतनी संपत्ति है, उसके लिए देश की राजनीति खरीदना कितना मुश्किल होगा?

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता के वोट का अधिकार जिंदा रहना चाहिए और विपक्ष इसी अधिकार की रक्षा के लिए लड़ रहा है। जनता को समझना होगा कि गलत लोगों को सत्ता से बाहर करना उसका कर्तव्य है। उन्होंने हाल में निर्दलीय चुनाव जीतकर भाजपा में शामिल हुए प्रतिनिधि का जिक्र करते हुए कहा कि जनता ने उन्हें विपक्ष के समर्थन में वोट दिया था, लेकिन उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली। यह जनादेश का अपमान है।

सहनी ने कहा कि इस मामले में न्यायिक प्रक्रिया चल रही है और अदालत को फैसला देना है। उन्होंने कहा कि जनता ने जिन लोगों को सरकार के विरोध में वोट दिया, उनका दूसरी पार्टी में शामिल होना जनादेश के साथ विश्वासघात है।

वीआईपी संस्थापक ने भाजपा पर गठबंधन धर्म नहीं निभाने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा को नीयत और नीति से कोई मतलब नहीं है, उसे सिर्फ सत्ता चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा दो तरह का गठबंधन धर्म निभाती है। सामने से साथ रहती है और पीछे से पीठ में खंजर भोंकने की कोशिश करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने उनके साथ भी ऐसा किया और अन्य सहयोगियों के साथ भी यही रवैया अपनाया।

सहनी ने कहा कि भाजपा ने पहले से ही पैसे और अन्य तरीकों से अपना काम किया और चुनाव जीतने के बाद संबंधित लोग उसके पास चले गए। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को ही पसंद किया गया था, तो संबंधित प्रतिनिधियों को पहले से उसके साथ रहना चाहिए था। जनता के वोट का सम्मान होना चाहिए और गठबंधन में पारदर्शिता तथा विश्वास बनाए रखना जरूरी है।