नीतीश के इस्तीफे पर नया बवाल: सिग्नेचर पर उठे सवाल, सियासत में गरमाई बहस
इसी बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एमएलसी सुनील कुमार ने इस्तीफे की प्रक्रिया पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए इस्तीफा पत्र में किए गए हस्ताक्षर की जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि इतने बड़े पद का इस्तीफा अधिकृत प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, ऐसे में यह जांच जरूरी है कि सिग्नेचर असली हैं या नहीं।
दरअसल, नीतीश कुमार ने सोमवार को बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिया था, जिसे सभापति ने स्वीकार भी कर लिया। लेकिन इसके बाद से ही विपक्ष लगातार यह आरोप लगा रहा है कि उन पर दबाव बनाकर इस्तीफा दिलवाया गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव पहले ही इसे बीजेपी की चाल बता चुके हैं, और अब सिग्नेचर को लेकर नया मुद्दा सामने आ गया है।
इस्तीफा पत्र सामने आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके हस्ताक्षर को लेकर हो रही है। बताया जा रहा है कि इस बार उन्होंने अपना नाम पूरी तरह हिंदी में “नीतीश कुमार” लिखा है, जबकि पहले उनके सिग्नेचर हिंदी और उर्दू शैली के मिश्रण में होते थे। यही बदलाव अब सियासी बहस का कारण बन गया है।
हालांकि, जानकारों का मानना है कि बढ़ती उम्र के साथ हस्ताक्षर की शैली बदलना सामान्य बात है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 से ही उनके साइन करने के तरीके में बदलाव देखा जा रहा है। इसके बावजूद विपक्ष इस मुद्दे को हवा दे रहा है और जांच की मांग कर रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या यह विवाद सिर्फ सिग्नेचर तक सीमित रहेगा या आने वाले दिनों में यह बिहार की राजनीति में एक नया सियासी तूफान खड़ा करेगा। फिलहाल, सत्ता और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज है और पूरे मामले पर सबकी नजर टिकी हुई है।