विकास नहीं, चुनावी रैली: बिहार-बंगाल दौरे को विपक्ष ने बताया भाजपा का चुनावी दांव

 

Patna: बिहार और पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल तेज हो चला है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शुक्रवार का दौरा केवल विकास परियोजनाओं के उद्घाटन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाजपा की चुनावी रणनीति का गहरा संदेश माना जा रहा है।

बिहार को मिला 13,000 करोड़ का पैकेज

पीएम मोदी गया जिले से करीब 13,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे। नाम बदलकर गया जी किए जाने के बाद प्रधानमंत्री पहली बार यहां आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यह सभा केवल विकास योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि मगध क्षेत्र में भाजपा-एनडीए की कमजोर कड़ी को मजबूत करने का प्रयास है।

साल 2020 के विधानसभा चुनाव में मगध के पांच जिलों (गया, औरंगाबाद, जहानाबाद, नवादा और अरवल) की 26 सीटों में एनडीए को महज छह सीटें मिली थीं। जेडीयू तो एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। ऐसे में मोदी का यह दौरा कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने और राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा का जवाब माना जा रहा है।

बंगाल को 5,200 करोड़ की सौगात, ममता के गढ़ में सभा

वहीं पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी 5,200 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स जनता को समर्पित करेंगे। इसमें मेट्रो से जुड़ी तीन बड़ी योजनाएं शामिल हैं। उनका कार्यक्रम उत्तर 24 परगना के दमदम इलाके में है, जहां टीएमसी का लंबे समय से मजबूत दबदबा है।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि भाजपा ने इस जगह का चयन सोच-समझकर किया है। यही वह क्षेत्र है, जहां अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के समय भाजपा नेता तपन सिकदर सांसद रहे थे। भाजपा इसे आज भी अपनी संभावना की भूमि मानती है।

यह इलाका बांग्लादेश सीमा से सटा है और भाजपा लगातार घुसपैठ व शरणार्थी मुद्दों को लेकर टीएमसी पर निशाना साधती रही है। संभावना है कि मोदी अपने भाषण में भ्रष्टाचार और घुसपैठ संरक्षण को बड़ा मुद्दा बनाएंगे।

विपक्ष भी आक्रामक तेवर में

उधर, बिहार और बंगाल दोनों राज्यों में विपक्ष भी मैदान में डटा है।
    •    राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और दीपंकर भट्टाचार्य बिहार में इंडिया गठबंधन के तेवर तेज कर चुके हैं।
    •    बंगाल में ममता बनर्जी ने संविधान संशोधन और भाषा भेदभाव के मुद्दे पर भाजपा पर तीखा हमला बोला और गठबंधन के साथ एकजुटता दिखाई।

यानी मोदी का यह दौरा विपक्षी हमलों का सीधा राजनीतिक जवाब भी है।

चुनावी युद्ध की घोषणा?

विश्लेषकों का कहना है कि मोदी के गया और दमदम से उठे भाषण केवल विकास योजनाओं की घोषणा नहीं होंगे, बल्कि भाजपा की आगामी चुनावी रणनीति का खाका पेश करेंगे।
    •    बिहार में लक्ष्य: मगध क्षेत्र की खोई जमीन वापस पाना।
    •    बंगाल में लक्ष्य: ममता के गढ़ में सेंध लगाना।
    •    और पूरे देश में संदेश: भाजपा विकास को ही अपना सबसे बड़ा चुनावी हथियार बनाएगी।