अब रजिस्ट्री के लिए दफ्तर नहीं, दफ्तर आएगा घर: नीतीश सरकार का बुजुर्गों को बड़ा तोहफा

 

Bihar political news: बिहार में सुशासन की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को ‘सात निश्चय-3’ कार्यक्रम के तहत एक अहम और जनहितकारी फैसले की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि 20 नवंबर 2025 को नई सरकार के गठन के बाद राज्य को देश के अग्रणी और विकसित राज्यों की कतार में खड़ा करने के उद्देश्य से सात निश्चय-3 को लागू किया गया है। इसके सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान–जीवन आसान (Ease of Living)’ के तहत आम लोगों, खासकर बुजुर्गों की रोजमर्रा की परेशानियों को कम करने पर सरकार का फोकस है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि 80 वर्ष या उससे अधिक उम्र के वृद्ध नागरिकों को जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री के दौरान होने वाली दिक्कतों को देखते हुए सरकार ने निबंधन प्रक्रिया को पूरी तरह सरल करने का निर्णय लिया है। अब ऐसे बुजुर्गों को जरूरत पड़ने पर घर बैठे ही रजिस्ट्री से जुड़ी सेवाएं मिलेंगी। इसके लिए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग की ओर से चलंत निबंधन इकाई (मोबाइल रजिस्ट्रेशन यूनिट) की व्यवस्था की जाएगी। इस सुविधा के लिए बुजुर्ग नागरिक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।

नीतीश कुमार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जमीन या फ्लैट की रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया अधिकतम सात कार्य दिवसों में पूरी की जाए, ताकि बुजुर्गों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें। सरकार का उद्देश्य है कि उम्र और असहजता किसी नागरिक के अधिकारों में बाधा न बने।

इसी कड़ी में जमीन खरीदने वालों की परेशानी को कम करने के लिए एक और महत्वपूर्ण व्यवस्था की जा रही है। अब रजिस्ट्री से पहले ही क्रेता और विक्रेता को भूमि की अद्यतन स्थिति की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके तहत निबंधन विभाग आवेदन मिलने के बाद संबंधित अंचल कार्यालय से जमीन की वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट मंगवाकर आवेदक को देगा। इससे जमीन विवाद, धोखाधड़ी और भ्रम की आशंका काफी हद तक कम होगी।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इन सभी नई व्यवस्थाओं को 1 अप्रैल 2026 से लागू करने के निर्देश दे दिए गए हैं। साथ ही, इस प्रणाली को और बेहतर बनाने के लिए सरकार ने 19 जनवरी 2026 तक आम नागरिकों से सुझाव भी आमंत्रित किए हैं।

नीतीश कुमार ने भरोसा जताया कि यह पहल न केवल बुजुर्ग नागरिकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी, बल्कि भूमि निबंधन की प्रक्रिया को पारदर्शी, भरोसेमंद और नागरिकों के अनुकूल बनाने में भी मील का पत्थर साबित होगी।