गयाजी में पितृपक्ष मेले का ऐतिहासिक समापन, 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
गयाजी: विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष महासंगम-2026 का शनिवार को भव्य एवं सफल समापन हो गया। 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक चले इस ऐतिहासिक मेले में 51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने गयाजी पहुंचकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति एवं मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान और तर्पण किया। बेहतर मेला प्रबंधन, स्वच्छता, सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए की गई व्यवस्थाओं की देश-विदेश से आए तीर्थयात्रियों ने सराहना की। मेले की सफलता को जिला प्रशासन ने सामूहिक प्रयास, जनसहभागिता और सेवाभाव का परिणाम बताया।
समापन के अवसर पर जिला पदाधिकारी डॉ. शशांक शुभंकर ने प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारियों, नगर निगम, स्वास्थ्य, परिवहन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों-कर्मियों, सफाईकर्मियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, एनसीसी कैडेटों, स्काउट-गाइड, नेहरू युवा केंद्र के स्वयंसेवकों, मीडिया प्रतिनिधियों और गयाजी के नागरिकों के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि सभी के बेहतर समन्वय और समर्पित प्रयासों से पितृपक्ष मेला-2026 को सफल, सुव्यवस्थित और यादगार बनाया जा सका। श्रद्धालु यहां से गयाजी और बिहार की सकारात्मक छवि लेकर लौटे हैं।
51 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किया पिंडदान
इस वर्ष पितृपक्ष मेले में देश के विभिन्न राज्यों के साथ अमेरिका, रूस, फ्रांस, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका सहित कई देशों से 40 से अधिक विदेशी पिंडदानी भी पहुंचे। फल्गु नदी में पर्याप्त जल की उपलब्धता और गयाजी डैम श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। पहले जहां तर्पण के लिए नदी में गड्ढा खोदकर पानी निकालना पड़ता था, वहीं इस बार पर्याप्त जल उपलब्ध होने से श्रद्धालुओं को सहूलियत मिली।
टेंट सिटी से लेकर ई-रिक्शा तक की सुविधा
गांधी मैदान में विकसित टेंट सिटी में 20 हजार से अधिक तीर्थयात्रियों ने निःशुल्क आवासन किया। यहां श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं के साथ जीविका दीदियों के स्टॉल और सुधा के काउंटर भी उपलब्ध कराए गए। वहीं, मेला क्षेत्र में निःशुल्क ई-रिक्शा सेवा का 10.70 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने लाभ उठाया। विष्णुपद मंदिर से चांद चौराहा और बंगाली आश्रम तक नो-व्हीकल जोन बनाकर आवाजाही को सुगम बनाया गया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर श्रद्धालुओं के बीच गंगाजल के पाउच भी वितरित किए गए। विष्णुपद मंदिर, देवघाट, सीताकुंड, गांधी मैदान की टेंट सिटी और विभिन्न पिंडवेदी स्थलों पर गंगाजल उपलब्ध कराया गया। बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई, जबकि खोया-पाया केंद्र के माध्यम से 1,334 लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया। आईवीआरएस प्रणाली के जरिए पांच हजार से अधिक कॉल पर श्रद्धालुओं की समस्याओं के समाधान के लिए समन्वय किया गया।
स्वास्थ्य, सुरक्षा और स्वच्छता पर रहा विशेष जोर
मेला अवधि में स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से 1,56,208 से अधिक श्रद्धालुओं को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर के समीप बीटीएमसी के शिविर में भी 10 हजार से अधिक लोगों का उपचार किया गया। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जांच के लिए विशेष टीम तैनात रही।
जलाशयों के आसपास एसडीआरएफ और गोताखोरों की तैनाती की गई। विष्णुपद मंदिर में कतारबद्ध दर्शन, संकरी गलियों में निगरानी और भीड़ नियंत्रण के लिए वॉकी-टॉकी से लैस पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई। इस बार एआई तकनीक से विदेशी श्रद्धालुओं के साथ भाषा के स्तर पर संवाद करने और उनकी समस्याएं समझने में सहायता ली गई। छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षित आवाजाही के लिए क्यूआर कोड आधारित रिस्टबैंड की व्यवस्था भी की गई।
नगर निगम की ओर से घाटों, पिंडवेदी स्थलों, आवासन केंद्रों और टेंट सिटी में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। फल्गु नदी से पूजा सामग्री एवं अपशिष्ट हटाने, फॉगिंग कराने और विष्णुपद मंदिर परिसर की नियमित सफाई पर जोर दिया गया। मेला शुरू होने से पहले प्रमुख सड़कों की मरम्मत और आवश्यक स्थानों पर नई सड़कें भी बनाई गईं।
विश्वस्तरीय आध्यात्मिक केंद्र बनाने पर जोर
समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार, प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा और राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने भी मेला प्रबंधन की सराहना की। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने गया-बोधगया कॉरिडोर के निर्माण में तेजी लाने तथा आधारभूत सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया। उन्होंने निरंजना नदी से मुहाने नदी तक गाद की उड़ाही और नदी की सफाई की आवश्यकता भी बताई।
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने गयाजी को विश्वस्तरीय आध्यात्मिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सड़क, पेयजल, आवासन, स्वच्छता, प्रकाश, सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाना जरूरी है। प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि पितृपक्ष मेला सनातन संस्कृति, आस्था और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता की जीवंत अभिव्यक्ति है। इसमें प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, सफाईकर्मियों, चिकित्साकर्मियों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों की भूमिका सराहनीय रही।
जिला प्रशासन ने मेला की सफलता में योगदान देने वाले सभी लोगों के प्रति आभार जताते हुए गयाजी को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधायुक्त आध्यात्मिक केंद्र बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।