बिहार चुनाव में सियासी पलटवार: बीजेपी को लगा बड़ा झटका, पूर्व विधायक रामचंद्र सहनी जनसुराज में हुए शामिल
Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का माहौल अब पूरी तरह गर्मा चुका है। पहले चरण के लिए नामांकन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन सियासी समीकरण हर दिन नए रूप में बदल रहे हैं। एनडीए ने जहां सीट बंटवारे का ऐलान कर दिया है, वहीं महागठबंधन अब भी अपने फॉर्मूले को अंतिम रूप देने में जुटा है। इसी बीच बीजेपी को एक बड़ा झटका लगा है- पार्टी के पूर्व विधायक रामचंद्र सहनी ने बीजेपी छोड़कर प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी का दामन थाम लिया है।
सुगौली से जुड़े पूर्व विधायक अब पीके के साथ
रामचंद्र सहनी, जो पहले सुगौली विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के विधायक रह चुके हैं, अब जनसुराज के नए चेहरे के रूप में उभरे हैं। शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने औपचारिक रूप से जनसुराज की सदस्यता ग्रहण की। राजनीतिक हलकों में इसे बीजेपी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि सहनी न केवल स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली नेता हैं, बल्कि सुगौली और आसपास के इलाकों में पार्टी संगठन के मजबूत स्तंभ भी रहे हैं।
जेडीयू को भी डबल झटका
इधर, एनडीए के दूसरे घटक दल जेडीयू के लिए भी दिन आसान नहीं रहा। पूर्व मंत्री जय कुमार सिंह और वरिष्ठ नेता मंजीत सिंह ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
दोनों नेताओं ने संकेत दिए हैं कि वे जल्द ही किसी नए राजनीतिक मंच से अपनी राह तय करेंगे। इन इस्तीफों के बाद एनडीए के भीतर असंतोष की चर्चा एक बार फिर तेज हो गई है।
प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी ने दिखाई रफ्तार
दूसरी ओर, प्रशांत किशोर (पीके) लगातार अपनी पार्टी जनसुराज के विस्तार में जुटे हैं। उन्होंने शुक्रवार को दूसरी सूची जारी करते हुए 65 नए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। इससे पहले पहली सूची में 51 नाम घोषित किए गए थे। अब तक जनसुराज ने कुल 116 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं।
पीके ने बताया कि पार्टी ने “साफ-सुथरी छवि, जनता से जुड़ाव और सामाजिक सक्रियता” को उम्मीदवारों के चयन की प्राथमिकता बनाई है। उन्होंने कहा कि, “हम ऐसे लोगों को विधानसभा भेजना चाहते हैं जो जनता के प्रति जवाबदेह हों, न कि सत्ता के प्रति।”
युवाओं और महिलाओं को तरजीह
जनसुराज की दूसरी सूची में सामाजिक संतुलन और युवाओं की भागीदारी पर खास ध्यान दिया गया है। सूत्रों के अनुसार, अब तक घोषित 116 उम्मीदवारों में से 21 मुस्लिम समुदाय से हैं, जबकि 21 ओबीसी और 31 अति पिछड़ा वर्ग (EBC) के प्रत्याशी शामिल हैं। महिलाओं और युवाओं को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर अब पारंपरिक राजनीति से अलग एक वैकल्पिक मॉडल पेश करने की कोशिश में हैं, जहां “जनता के बीच से नेता” तैयार करने की बात हो रही है, न कि “नेताओं के बीच से जनता के नाम पर उम्मीदवार।”
बदलते समीकरण, बढ़ती सरगर्मी
पहले चरण के नामांकन के बीच जिस तरह से नेताओं का पलायन और नए गठबंधन बन रहे हैं, उससे साफ है कि बिहार की राजनीति इस बार एक बार फिर ‘बदलाव बनाम भरोसा’ की कहानी लिखने जा रही है। बीजेपी के पूर्व विधायक का जनसुराज से जुड़ना इस बात का संकेत है कि प्रशांत किशोर अब केवल रणनीतिकार नहीं, बल्कि सियासी खिलाड़ी के रूप में उभर चुके हैं।