पटना में सियासी रण: मोदी की माँ पर विवादित टिप्पणी के बाद BJP का कांग्रेस दफ्तर पर धावा, सदाकत आश्रम में ईंट-पत्थर की बरसात
Patna: बिहार की सियासत में शुक्रवार का दिन बवाल और हंगामे से भरा रहा। दरभंगा में कांग्रेस नेता की जुबान फिसलने से शुरू हुआ विवाद पटना में सड़क से सदाकत आश्रम तक आ पहुँचा। मामला इतना गरमाया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं ने सीधे कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय पर धावा बोल दिया।
गेट तोड़ा, पत्थर बरसे, आश्रम बना रणभूमि
सूत्रों के मुताबिक, सदाकत आश्रम के बाहर विरोध-प्रदर्शन से शुरुआत हुई, लेकिन देखते ही देखते यह प्रदर्शन ईंट-पत्थर और लाठी-डंडे की बारिश में बदल गया। भीड़ ने गेट की जंजीर तोड़कर अंदर घुसकर जमकर उत्पात मचाया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और बीजेपी समर्थकों के बीच हाथापाई और पत्थरबाज़ी होती रही।
कांग्रेस का पलटवार: “गुंडाराज चरम पर”
घटना के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर जमकर कटाक्ष किया। पार्टी ने सोशल मीडिया पर लिखा, “बिहार में गुंडाराज अब पागल हो चुका है। पुलिस के सामने भाजपा दंगाइयों ने हमला किया, कार्यकर्ताओं के सिर फोड़ दिए। यह लोकतंत्र को कलंकित करने वाली घटना है।”
कटाक्ष करते हुए कांग्रेस ने कहा कि पुलिस का रोल देखने से तो ऐसा लग रहा था जैसे वह हमला मॉनिटर करने आई हो।
राहुल गांधी की यात्रा से बेचैन भाजपा?
कांग्रेस का आरोप है कि यह हमला दरअसल राहुल गांधी की वोटर अधिकार यात्रा से घबराहट का नतीजा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि बिहार में राहुल की सभाओं में मिल रही भीड़ से बीजेपी बौखला गई है, इसलिए अब “गुंडई” ही उसका असली हथियार बन चुकी है।
भाजपा का पलटवार: “गाली की राजनीति”
दूसरी ओर, बीजेपी इस पूरे प्रकरण को कांग्रेस की “गालीबाज़ राजनीति” का परिणाम बता रही है। दरअसल, कांग्रेस नेता नौशाद आलम पर आरोप है कि उन्होंने मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिवंगत मां पर अभद्र टिप्पणी की थी। इसी से नाराज़ होकर शुक्रवार को बीजेपी नेताओं ने पटना की सड़कों पर जोरदार प्रदर्शन किया और सदाकत आश्रम पहुँचकर हंगामा किया।
नतीजा: राजनीति गरमी पर, जनता ठंडी सांसें भर रही
अब सवाल ये है कि सियासत के अखाड़े में नेताओं की बयानबाज़ी और ईंट-पत्थरों की राजनीति से आखिर जनता को क्या हासिल हो रहा है?
पटना की गलियों में शुक्रवार को जो हुआ उसने यही दिखाया कि लोकतंत्र की दुहाई देने वाले दल, जब सत्ता और साख की लड़ाई में उतरते हैं तो फिर जनसभा से ज्यादा, जंग का मज़ा लेने लगते हैं।