‘शपथ के साथ सियासी सन्नाटा’: नीतीश के राज्यसभा जाने पर JDU में उठी खामोश बगावत

 
Political news: बिहार की राजनीति में एक बड़ा मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ले ली। संसद भवन में आयोजित समारोह में देश के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। लेकिन इस शपथ के साथ ही बिहार की सियासत में हलचल और बढ़ गई है।

जदयू में ‘खामोशी’ में छिपी बेचैनी

नीतीश कुमार के इस फैसले के बाद जदयू के अंदर एक अजीब सा सन्नाटा और असहजता देखने को मिल रही है। पार्टी नेता Nikhil Mandal की सोशल मीडिया पोस्ट ने इस खामोश नाराज़गी को खुलकर सामने ला दिया है।

खुशी भी नहीं, बधाई देने का मन भी नहीं

निखिल मंडल ने लिखा कि आमतौर पर ऐसे मौके पर जश्न का माहौल होता है, लेकिन इस बार न तो खुशी महसूस हो रही है और न ही बधाई देने का मन। हालांकि उन्होंने नीतीश कुमार के फैसले को उनका निजी निर्णय बताते हुए सम्मान भी जताया और उनके योगदान को सराहा।

सम्मान के साथ असहमति के संकेत

जदयू के भीतर उठती ये हल्की आवाजें अब बड़े सियासी संकेत में बदलती नजर आ रही हैं। एक ओर सार्वजनिक तौर पर सम्मान और बधाई है, तो दूसरी ओर भीतर ही भीतर असहमति और बेचैनी भी साफ झलक रही है।

ट्रांजिशन का दर्द या बदलाव की शुरुआत?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति ‘ट्रांजिशन का दर्द’ है जहां एक दौर खत्म हो रहा है और नया अध्याय शुरू होने की आहट है। नीतीश कुमार का दिल्ली जाना सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत भी माना जा रहा है।

अब नजर इस बात पर है कि यह खामोश नाराज़गी आगे चलकर किस रूप में सामने आती है क्या यह सिर्फ भावनात्मक प्रतिक्रिया है या फिर किसी बड़े सियासी बदलाव की शुरुआत।