दिल्ली से पटना तक सियासी सस्पेंस! 14 अप्रैल पर टिकी निगाहें, क्या बदलने वाली है सरकार?
दिल्ली में शपथ ग्रहण के दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी मौजूद थे, लेकिन पटना लौटने के बाद उनका बदला हुआ रुख कई सवाल खड़े कर रहा है। हमेशा सक्रिय रहने वाले सम्राट चौधरी करीब 24 घंटे तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहे यहां तक कि ज्योतिबा फुले जयंती जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में भी नहीं दिखे।
‘लो प्रोफाइल’ रणनीति या बड़े फैसले की तैयारी?
सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने अपने नेताओं को फिलहाल लो प्रोफाइल रहने का निर्देश दिया है। अंदरखाने यह भी चर्चा है कि सम्राट चौधरी को संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन अंतिम सहमति अभी बननी बाकी है।
इसी बीच सम्राट चौधरी की नीतीश कुमार से मुलाकात और उसके तुरंत बाद डिप्टी सीएम विजय सिंहा का राजभवन पहुंचना सियासी हलचल को और तेज कर देता है। माना जा रहा है कि नई सरकार के गठन की पटकथा लगभग तैयार है।
पोस्टर पॉलिटिक्स से लेकर दिल्ली कनेक्शन तक
भाजपा कार्यालय के बाहर सम्राट चौधरी को सीएम बनाने की मांग वाला पोस्टर लगना और फिर तुरंत हट जाना, सियासी रणनीति की ओर इशारा करता है। वहीं बिहार प्रभारी विनोद तावड़े की सक्रियता और नेताओं से लगातार मुलाकातें भी बड़े फैसले की आहट दे रही हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व नरेंद्र मोदी और अमित शाह के स्तर पर होगा, जहां से संकेत मिलते ही पूरा सियासी समीकरण बदल सकता है।