पटना नीट छात्रा हत्याकांड पर सियासत तेज, CBI जांच की मांग पर मचा घमासान; तेजस्वी ने नवरुणा कांड गिनाकर उठाए सवाल
विपक्षी दलों का कहना है कि सीबीआई के पास पहले से कई ऐसे मामले हैं, जो सालों से अनसुलझे पड़े हैं। कुछ मामलों में तो एजेंसी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर चुकी है। ऐसे में नीट छात्रा मामले में भी न्याय की उम्मीद कमजोर होती दिख रही है।
तेजस्वी यादव ने क्यों उठाया नवरुणा कांड का मुद्दा
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से सीबीआई जांच की सिफारिश की है। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार पर जोरदार हमला बोला।
तेजस्वी ने अपने पोस्ट में नवरुणा चक्रवर्ती कांड का जिक्र करते हुए कहा कि यह मामला नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ पर एक बड़ा सवाल है। उन्होंने याद दिलाया कि 12 साल बीतने के बाद भी नवरुणा मामले में सीबीआई किसी आरोपी को सजा दिलाने में नाकाम रही और अंत में केस बंद कर दिया गया।
नवरुणा कांड से तुलना पर उठे सवाल
अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि तेजस्वी यादव ने नीट छात्रा हत्याकांड की तुलना नवरुणा कांड से क्यों की। विपक्ष का मानना है कि नवरुणा कांड यह दिखाता है कि सीबीआई जांच के बावजूद भी कई मामलों में पीड़ित परिवारों को न्याय नहीं मिल पाया।
कौन थी नवरुणा चक्रवर्ती
नवरुणा चक्रवर्ती मुजफ्फरपुर की रहने वाली 12 साल की छात्रा थी। वह सेंट जेवियर्स स्कूल में सातवीं कक्षा में पढ़ती थी और पढ़ाई में काफी होनहार थी। उसके पिता अतुल्य चक्रवर्ती फार्मास्यूटिकल व्यवसाय से जुड़े थे। परिवार शहर के पुराने इलाके जॉन्फर लाल रोड स्थित चक्रवर्ती लेन में रहता था।
अपहरण से मर्डर तक, कैसे उलझता गया मामला
17–18 सितंबर 2012 की रात नवरुणा अपने कमरे में सो रही थी। इसी दौरान अज्ञात लोग खिड़की की जाली तोड़कर घर में घुसे और बच्ची का अपहरण कर लिया। सुबह परिवार को घटना की जानकारी मिली। पुलिस ने जांच शुरू की, लेकिन कोई ठोस सुराग नहीं मिला। फिरौती की भी कोई मांग नहीं की गई, जिससे मामला और रहस्यमय हो गया।
कंकाल मिलने से और उलझी जांच
घटना के करीब दो महीने बाद नवरुणा के घर के पास एक नाली से कंकाल बरामद हुआ। पुलिस ने इसे नवरुणा का बताया, लेकिन परिवार ने इस दावे को मानने से इनकार कर दिया। डीएनए जांच को लेकर भी विवाद हुआ, जिससे केस और उलझ गया।
जमीन विवाद बना जांच की अहम कड़ी
जांच के दौरान सामने आया कि परिवार की कीमती जमीन इस पूरे मामले की वजह हो सकती है। आरोप लगा कि जमीन हड़पने के लिए अपहरण और हत्या की साजिश रची गई। इस दौरान स्थानीय नेताओं और जमीन कारोबारियों के नाम भी सामने आए।
CBI जांच और अधूरा इंसाफ
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने जांच शुरू की। कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं, लेकिन मजबूत सबूतों के अभाव में सीबीआई ने 2020 में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी। आरोपी बरी हो गए और परिवार को आज तक न्याय नहीं मिल सका।
नीट छात्रा केस में CBI पर उठता भरोसे का सवाल
नवरुणा कांड की पृष्ठभूमि में विपक्ष का कहना है कि नीट छात्रा हत्याकांड को सीबीआई को सौंपना पीड़ित परिवार के साथ अन्याय हो सकता है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है और क्या इस हाई-प्रोफाइल केस में पीड़िता को समय पर न्याय मिल पाता है या नहीं।