नीतीश मंत्रिमंडल में बड़े फेरबदल की तैयारी! कौन बनेगा नया मंत्री और किससे छिनेगा विभाग, इस सवाल पर पटना के सत्ता गलियारों में मचा सियासी विस्फोट
Bihar political update: बिहार की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है। एनडीए को मिली भारी जीत के बाद नई सरकार बन चुकी है और विधानसभा का सत्र भी शुरू हो गया है। अब सूबे की सियासत का सबसे बड़ा सवाल है, नीतीश कुमार अपनी नई टीम में किन चेहरों को जगह देंगे? दिसंबर–जनवरी में संभावित मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर सत्ता के गलियारों में चर्चाओं का दौर लगातार तेज हो रहा है। कहीं नए मंत्रियों के नामों की फुसफुसाहट है तो कहीं विभागों के फेरबदल के कयास। कुल मिलाकर पटना की राजनीतिक हवा में नरमी और सख़्ती, दोनों का रंग घुला हुआ है।
9 कुर्सियाँ खाली, चर्चा तेज
नीतीश कैबिनेट में फिलहाल 9 मंत्री पद खाली हैं- जिनमें जेडीयू के छह और बीजेपी के तीन पद शामिल हैं।
संवैधानिक प्रावधान के अनुसार बिहार में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम 36 मंत्री बनाए जा सकते हैं। एनडीए के आंतरिक फार्मूले के हिसाब से:
• बीजेपी – 17 मंत्री
• जेडीयू – 15 (सीएम सहित)
• एलजेपी – 2
• हम और आरएलपी – 1–1
इसी आधार पर जेडीयू और बीजेपी दोनों दलों के पास अतिरिक्त मंत्रियों को शामिल करने की पर्याप्त गुंजाइश है।
जेडीयू का सामाजिक समीकरण फार्मूला
सूत्रों के मुताबिक जेडीयू इस बार कैबिनेट विस्तार को सिर्फ औपचारिकता नहीं समझ रही, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संतुलन साधने का बड़ा मौका मान रही है।
पार्टी की प्राथमिकता होगी कि:
• कुशवाहा समाज
• अति पिछड़ा वर्ग (EBC) समुदाय
के नेताओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिले, ताकि सामाजिक आधार और मजबूत किया जा सके।
मौजूदा जेडीयू मंत्रियों में बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास 5 विभाग, विजय चौधरी के पास 4, जबकि श्रवण कुमार और सुनील कुमार दो-दो विभाग संभाल रहे हैं। माना जा रहा है कि नए मंत्रियों के आने के साथ कुछ प्रमुख विभागों का पुनर्वितरण लगभग तय है।
बीजेपी भी तैयार कर रही नया ब्लूप्रिंट
बीजेपी खेमे में भी स्थिति कम दिलचस्प नहीं।
विजय सिन्हा, मंगल पांडेय, नितिन नबीन और अरुण शंकर प्रसाद इन चार नेताओं के पास दो-दो विभाग हैं। ऐसे में पार्टी कोशिश कर रही है कि:
• नए चेहरों को जगह मिले
• विभागों का संतुलन कायम रहे
• कम प्रदर्शन वाले विभागों में फेरबदल संभव हो
’तोड़फोड़’ की अफवाहों पर जेडीयू का जवाब
हाल में यह भी खबरें चलीं कि जेडीयू कुछ दूसरे दलों के विधायकों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है।
लेकिन पार्टी ने इसे पूरी तरह नकारते हुए कहा कि:
• मौजूदा संख्या बल बेहद मजबूत है
• किसी तरह की राजनीतिक इंजीनियरिंग की जरूरत नहीं
• राज्यसभा चुनाव अभी छह महीने दूर हैं, और मौजूदा स्थिति में एनडीए पाँचों सीटें जीतने की स्थिति में है
यानी जोड़-तोड़ की राजनीति की कोई मजबूरी इस वक्त नहीं दिखती।
कैबिनेट विस्तार: आने वाले वर्षों की राजनीति का खाका
नीतीश सरकार का यह विस्तार सिर्फ विभागों की अदला-बदली तक सीमित नहीं होगा।
यह तय करेगा:
• आने वाले वर्षों में सत्ता की दिशा
• राजनीतिक गठबंधनों की मजबूती
• सामाजिक समीकरण की नई रूपरेखा
• 2026–27 की बड़ी राजनीतिक तैयारियाँ
यानी साफ है बिहार की सियासत के पन्ने अभी और पलटने वाले हैं।