खानकाह रहमानी में राहुल–तेजस्वी की मौजूदगी से बिहार की सियासत में आया भूचाल
Munger: बिहार की राजनीति में शुक्रवार को एक बड़ा घटनाक्रम दर्ज हुआ। मुंगेर के चंदनबाग से वोटर अधिकार यात्रा की शुरुआत हुई, जिसमें कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव, वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी और भाकपा(माले) महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य एक मंच पर नज़र आए। यात्रा में शामिल हज़ारों कार्यकर्ताओं का हुजूम शहर की गलियों से होता हुआ नेशनल हाईवे के रास्ते भागलपुर की ओर बढ़ा।
लेकिन इस पूरे कार्यक्रम की सबसे अहम कड़ी रही नेताओं की खानकाह रहमानी की यात्रा। यहां INDIA गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने अमीरे शरीअत मौलाना अहमद वली फैजल रहमानी से करीब आधे घंटे तक चर्चा की। राजनीतिक हलकों में इस मुलाकात को सिर्फ एक शिष्टाचार भेंट नहीं, बल्कि गंभीर सियासी संदेश माना जा रहा है।
अमीरे शरीअत का बयान और बढ़ा महत्व
मुलाकात के बाद राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने अमीरे शरीअत के पिता, मरहूम हजरत वली रहमानी की मजार पर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद मौलाना रहमानी ने मीडिया से कहा, “राहुल गांधी के परिवार और खानकाह रहमानी का पुराना रिश्ता रहा है। जो मुद्दा उन्होंने उठाया है, वह गंभीर है। चुनाव आयोग द्वारा एक साथ 65 लाख वोटरों का नाम हटाना लोकतंत्र के लिए खतरे की घंटी है। हमें राजनीति से ऊपर उठकर देश की मजबूती की बात करनी चाहिए।”
उनका यह बयान सीधे तौर पर यात्रा के संदेश को और भी वज़नदार बना गया।
ऐतिहासिक रिश्ता, सियासी असर
कांग्रेस और खानकाह रहमानी का रिश्ता नया नहीं है। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और यहां तक कि जवाहरलाल नेहरू भी इस खानकाह का दौरा कर चुके हैं। यही वजह है कि राहुल गांधी की मौजूदगी को एक “ऐतिहासिक कड़ी की पुनर्स्थापना” माना जा रहा है।
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम समाज पर गहरी पकड़ रखने वाली खानकाह रहमानी में INDIA गठबंधन का यह दिखावटी नहीं, बल्कि रणनीतिक कदम है। खासकर तब, जब राहुल गांधी की यात्रा को जनता के वोट की रक्षा और लोकतंत्र की मजबूती से जोड़ा जा रहा है।
चुनावी संदेश साफ
मुंगेर से भागलपुर तक चली यह यात्रा सिर्फ एक राजनीतिक मार्च नहीं, बल्कि बिहार की चुनावी फिज़ा में साफ संदेश देने वाली रणनीति थी। विपक्ष अब इसे वोटरों के सम्मान और उनके अधिकार की लड़ाई के तौर पर पेश कर रहा है।