‘मेरे रहते सीमांचल नहीं बनेगा केंद्र शासित प्रदेश’: पप्पू यादव का केंद्र सरकार को खुला चुनौती
• बोले- अगर विकास चाहिए तो सीमांचल, कोसी और मिथिलांचल को मिलाकर नया राज्य बनाओ
सांसद ने इस पूरे मुद्दे को एक सुनियोजित राजनीतिक रणनीति करार देते हुए कहा कि इसके पीछे की असली मंशा बिहार और पश्चिम बंगाल की राजनीति को प्रभावित करना है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार पहले बिहार की राजनीति पर पूरा नियंत्रण चाहती है और सीमांचल का मुद्दा उसी दिशा में उठाया जा रहा है।
बंगाल चुनाव से जोड़ा मामला
पप्पू यादव ने दावा किया कि सीमांचल को लेकर उठ रही चर्चा का संबंध आगामी वेस्ट बंगाल के चुनावी समीकरणों से भी जुड़ा हो सकता है। उनके मुताबिक, बिहार के सीमांचल क्षेत्र की राजनीति को साधकर पड़ोसी राज्य की राजनीति को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।
अलग राज्य बनाने का दिया सुझाव
केंद्र शासित प्रदेश के प्रस्ताव का विरोध करते हुए सांसद ने एक अलग सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार सच में इस क्षेत्र का विकास चाहती है, तो सीमांचल, कोसी और मिथिलांचल को मिलाकर एक अलग राज्य बनाया जाए।
उनका कहना है कि एक नया राज्य बनने से इस पिछड़े इलाके के विकास को गति मिलेगी और स्थानीय समस्याओं का बेहतर समाधान हो सकेगा।
‘अस्मिता से जुड़ा है सवाल’
पप्पू यादव ने कहा कि सीमांचल की जनता का अपना इतिहास और गौरव है। इस क्षेत्र की पहचान और अधिकारों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर वह सड़क से लेकर संसद तक संघर्ष करेंगे और सीमांचल के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर आवाज उठाते रहेंगे।