तेज प्रताप यादव की बढ़ीं मुश्किलें! आज कोर्ट में दाखिल होगी जमानत याचिका, बिहार बंद के दौरान हिंसा मामले में जेल में हैं बंद

 

Bihar Political Update: जनशक्ति जनता दल के प्रमुख और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। बिहार बंद के दौरान हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में बेउर जेल में न्यायिक हिरासत में बंद तेज प्रताप यादव की ओर से सोमवार को अदालत में जमानत याचिका दाखिल की जाएगी। उनके वकील कोर्ट में आवेदन देकर न्यायिक हिरासत से रिहाई की मांग करेंगे।

अब इस मामले में अदालत के रुख पर सभी की नजरें टिकी हैं। सुनवाई के बाद ही साफ होगा कि तेज प्रताप यादव को जमानत मिलती है या उन्हें फिलहाल जेल में ही रहना होगा।

सिटी सेंटर मॉल से हिरासत में लिए गए थे तेज प्रताप

तेज प्रताप यादव को पटना पुलिस ने शनिवार शाम सिटी सेंटर मॉल से हिरासत में लिया था। गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस उन्हें पटना के अलग-अलग इलाकों के थानों में ले गई। इस दौरान उन्हें दीघा, दानापुर और नौबतपुर समेत कई स्थानों पर रखा गया।

बाद में कड़ी सुरक्षा के बीच उन्हें देर रात अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद तेज प्रताप यादव को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया, जिसके बाद उन्हें बेउर जेल भेज दिया गया।

बिहार बंद के दौरान प्रदर्शन से जुड़ा है मामला

पूरा विवाद नीट पेपर लीक, छात्रों पर कथित लाठीचार्ज और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर बुलाए गए बिहार बंद से जुड़ा है। विपक्षी दलों की ओर से बंद के समर्थन में प्रदर्शन किए गए थे।

तेज प्रताप यादव भी इस आंदोलन में शामिल हुए थे और पटना के गांधी मैदान स्थित गेट नंबर-10 के पास प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच स्थिति बिगड़ गई। झड़प, पथराव और अफरा-तफरी के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की।

इसी घटनाक्रम को लेकर पुलिस ने तेज प्रताप यादव के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत कई गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस मामले में उनकी भूमिका की जांच कर रही है और आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने में उनकी भूमिका रही।

तेज प्रताप ने आरोपों को बताया राजनीतिक कार्रवाई

दूसरी ओर, तेज प्रताप यादव और उनके समर्थक पुलिस के आरोपों को खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि गिरफ्तारी राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई है और आंदोलन की आवाज को दबाने के लिए सरकार पुलिस का इस्तेमाल कर रही है।

तेज प्रताप की गिरफ्तारी के बाद बिहार की सियासत भी गरमा गई है। सत्ता पक्ष इसे कानून के तहत की गई कार्रवाई बता रहा है, जबकि विपक्ष सरकार पर आंदोलनकारियों के खिलाफ दमनात्मक कार्रवाई करने का आरोप लगा रहा है।

अब तेज प्रताप यादव की जमानत याचिका पर होने वाली सुनवाई इस पूरे मामले में अगला बड़ा घटनाक्रम होगी। अदालत के फैसले से यह तय होगा कि तेज प्रताप यादव को तत्काल राहत मिलती है या उनकी न्यायिक हिरासत आगे भी जारी रहती है।