बेंगलुरु में गुरुदेव श्री श्री रविशंकर से मिले विजय कुमार सिन्हा, बिहार में जैविक खेती और ऑर्गेनिक DAP को बढ़ावा देने पर हुई चर्चा

प्राकृतिक खेती को नई दिशा देने की तैयारी, किसानों की लागत घटाने और आय बढ़ाने पर जोर
 

Newshaat Desk: बिहार के वरिष्ठ नेता एवं उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिंहा ने बेंगलुरु में विश्वप्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु एवं श्री श्री रवि शंकर से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद और मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस दौरान प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि और किसानों के लिए आधुनिक विकल्पों को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।

मुलाकात के दौरान श्री श्री एग्रीकल्चर ट्रस्ट द्वारा विकसित पेटेंटेड ऑर्गेनिक डीएपी (आर्गेनिक डीएपी) एवं अन्य जैविक उर्वरकों की जानकारी साझा की गई। ट्रस्ट के वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने रासायनिक उर्वरकों के विकल्प के रूप में जैविक खेती की संभावनाओं और उसके लाभों पर विस्तार से प्रस्तुति दी।

बिहार में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम

विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के आह्वान को धरातल पर उतारने के लिए बिहार सरकार लगातार काम कर रही है। राज्य में कृषि रोडमैप के तहत बड़े पैमाने पर जैविक और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को देखते हुए जैविक उर्वरक आने वाले समय में किसानों के लिए सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बन सकते हैं।

किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

उपमुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि नई जैविक तकनीकों और कृषि नवाचारों के माध्यम से बिहार के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे खेती की लागत कम होगी, उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ेगी और आत्मनिर्भर कृषि व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि बिहार सरकार किसानों की आय बढ़ाने और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा इस दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।

कई राज्यों के दिग्गज नेता भी रहे मौजूद

इस अवसर पर एन. चंद्रबाबू नायडू , प्रमोद सावंत सहित विभिन्न राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कृषि, पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया।

जैविक खेती पर बढ़ता फोकस

बेंगलुरु में हुई यह मुलाकात केवल औपचारिक शिष्टाचार तक सीमित नहीं रही, बल्कि बिहार में कृषि के भविष्य, प्राकृतिक खेती के विस्तार और किसानों को आधुनिक एवं सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखी जा रही है।