“जब सम्मान ही नहीं बचा, तो वहां रहने का कोई मतलब नहीं था.” वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री JDU से निकले RJD में गए
Bihar Desk: बिहार में ठीक एक महीने बाद दो चरणों में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए मतदान होगा. मतलब साफ है कि अब सोचने का समय नहीं है. परिणाम चाहे जो भी आए मुख्य रूप से 7 फैक्टर्स की भूमिका कहीं न कहीं से रहेगी ही. 19 साल से ज्यादा समय से राज्य के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की अग्निपरीक्षा तो है ही. साथ ही लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव के साथ राहुल गांधी को उनके मुद्दों पर जनता का कितना साथ मिलता है यह भी पता चल जाएगा.
खैर बिहार राजनीति शुरू से दिलचस्प कहानी की तरह रही है. बिहार चुनाव में बहुत कम दिन ही बांकी रह गए हैं. ऐसे में हर बार की तरह इस बार भी उलटफेर का सिलसिला जारी है. इसी कड़ी में बिहार की राजनीति में गुरुवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला. जनता दल यूनाइटेड (JDU) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री लक्ष्मेश्वर राय ने पार्टी से इस्तीफा देकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थाम लिया. उन्होंने पटना में तेजस्वी यादव से मुलाकात कर पार्टी की सदस्यता ली.
RJD में शामिल होने के बाद लक्ष्मेश्वर राय ने JDU पर खुलकर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने वर्षों तक मेहनत की, वह अब अतिपिछड़ों की पार्टी नहीं रह गई है. राय के मुताबिक, JDU में अब उस वर्ग के लोगों की अनदेखी और अपमान होने लगा है. उन्होंने साफ कहा, “जब सम्मान ही नहीं बचा, तो वहां रहने का कोई मतलब नहीं था.”
लक्ष्मेश्वर राय ने इस मौके पर JDU नेता संजय झा पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि झा ने पूरी पार्टी पर कब्जा कर लिया है और दरभंगा में बिना उनकी अनुमति कोई भी सरकारी काम या ट्रांसफर नहीं होता. राय ने आरोप लगाया, “संजय झा ने JDU को खत्म कर दिया है.” तेजस्वी यादव से हाथ मिलाने के बाद राय ने कहा कि अब वे RJD की नीतियों और तेजस्वी यादव के नेतृत्व को मजबूत करेंगे और अतिपिछड़े वर्ग की आवाज को नई दिशा देंगे.