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कागज़ों में उद्योग, जमीनी हकीकत में सन्नाटा! पश्चिम बंगाल में 78 हजार से ज्यादा कंपनियां बंद, आंकड़ों ने खोली ‘विकास’ की पोल

राज्यसभा में केंद्र सरकार के आंकड़े-रजिस्टर्ड लाखों कंपनियों में से सिर्फ 61% ही सक्रिय, मुनाफे वाली कंपनियां बेहद कम
 
कागज़ों में उद्योग, जमीनी हकीकत में सन्नाटा!” पश्चिम बंगाल में 78 हजार से ज्यादा कंपनियां बंद, आंकड़ों ने खोली ‘विकास’ की पोल
Bengal News: पश्चिम बंगाल के औद्योगिक विकास को लेकर बड़े दावे करने वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। राज्यसभा में कॉरपोरेट मामलों का मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकड़ों ने राज्य की औद्योगिक स्थिति की अलग ही तस्वीर सामने रख दी है।

आंकड़ों में छिपी सच्चाई

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
    •    कुल रजिस्टर्ड कंपनियां: 2.54 लाख+
    •    सक्रिय कंपनियां: 1,54,575
    •    बंद (Struck Off): 78,615
    •    लिक्विडेशन में: 1,016

यानि, कुल कंपनियों में से सिर्फ करीब 61% ही सक्रिय हैं, जबकि बड़ी संख्या में कंपनियां पूरी तरह बंद हो चुकी हैं।

‘विकास’ बनाम ‘हकीकत’

विपक्ष का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस सरकार बंद हो चुकी कंपनियों को भी आंकड़ों में जोड़कर औद्योगिक विकास का दावा कर रही है। इसे लेकर तंज कसते हुए कहा जा रहा है कि “कब्रों को भी विकास में गिना जा रहा है।”

मुनाफे में कितनी कंपनियां?

और चौंकाने वाली बात यह है कि 1.54 लाख से ज्यादा सक्रिय कंपनियों में से सिर्फ 1,782 कंपनियां ही ऐसी हैं, जिन्होंने वित्त वर्ष 2024-25 में 10 करोड़ रुपये से अधिक का मुनाफा दर्ज किया।

राजनीतिक घमासान तेज

इन आंकड़ों के सामने आने के बाद ममता बनर्जी सरकार के दावों पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष इसे राज्य के औद्योगिक ढांचे की कमजोरी बता रहा है, वहीं सियासी बयानबाज़ी भी तेज हो गई है।