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नहीं हैं सुषमा स्वराज, लेकिन उनका 2014 का फॉर्मूला बंगाल में कैसे बन गया 'ब्रह्मास्त्र'? जिससे TMC का ढहने जा रहा किला, बीजेपी रचेगी इतिहास

 
Bengal Election
Bengal Election 2026: बंगाल की सियासत में इस वक्त हर दिन नया मोड़ देखने को मिल रहा है. चुनाव करीब आते ही राजनीतिक दल अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. इसी बीच बीजेपी ने एक ऐसा दांव चला है, जिसने पूरे राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है. पार्टी ने दिवंगत पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के 2014 के सफल 'हर बूथ-10 यूथ' फॉर्मूले को फिर से लागू करने का फैसला किया है. यह वही रणनीति है जिसने लोकसभा चुनाव में बीजेपी को जबरदस्त बढ़त दिलाई थी. अब इसी फॉर्मूले के सहारे पार्टी बंगाल में सत्ता तक पहुंचने का सपना देख रही है. सवाल यह है कि क्या यह रणनीति सच में चुनावी खेल बदल पाएगी या फिर यह सिर्फ एक और चुनावी प्रयोग बनकर रह जाएगी. जानते हैं पूरी कहानी.

2014 के लोकसभा चुनाव में जब यूपीए सरकार को हराने की जंग चल रही थी तब सुषमा स्वराज ने यह फॉर्मूला तैयार किया था. वोटिंग से सिर्फ सात-दस दिन पहले हर बूथ पर 10 युवाओं को चुनकर बूथ मैनेजमेंट को मजबूत कर दिया गया था. नतीजा सबके सामने है- एनडीए को भारी बहुमत मिला और मोदी प्रधानमंत्री बने. अब वही फॉर्मूला बंगाल में आजमाया जा रहा है. पार्टी के शीर्ष नेता मान रहे हैं कि बंगाल जैसे राज्य में जहां हर वोट कीमती है, वहां बड़े-बड़े रैली से ज्यादा असर व्यक्तिगत संपर्क से होता है. यही वजह है कि युवाओं को बूथ स्तर पर उतारा जा रहा है.

उस वक्त सुषमा जी ने कहा था कि बूथ को अभेद्य बनाने के लिए युवा सबसे बेहतर माध्यम हैं. युवा अपनी उम्र के कारण आसानी से दूसरे युवाओं और परिवार तक पहुंच बनाते हैं. 2014 में यही हुआ. अब बीजेपी उसी ट्रैक पर चल रही है. दिल्ली में बैठे सूत्र बता रहे हैं कि 152 सीटों के हर बूथ पर 10 युवा-युवतियों की नियुक्ति तेजी से हो रही है. खासकर युवतियों पर जोर दिया जा रहा है क्योंकि महिलाएं आजकल घर की सबसे बड़ी मतदाता बन चुकी हैं. ये 10 युवा-युवतियां बूथ के हर वोटर से व्यक्तिगत रूप से मिलेंगे. उन्हें वोट देने के लिए प्रेरित करेंगे. दोपहर 1 बजे तक कम से कम 50 प्रतिशत वोटिंग सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर प्रचार चलाएंगे. खासतौर पर महिलाओं और नए युवा वोटरों को फोकस रहेगा. पार्टी की रणनीति साफ है - अगर नई पीढ़ी और महिलाएं बीजेपी के साथ आईं तो बंगाल में अच्छा रिजल्ट पक्का है.

बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि बंगाल में पुराने वोटरों के साथ-साथ नई पीढ़ी और महिलाओं का झुकाव ही खेल बदल सकता है. युवा आजकल सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, वे बदलाव चाहते हैं. महिलाएं विकास, सुरक्षा और परिवार की चिंता करती हैं. इन्हीं दोनों वर्गों को अगर व्यक्तिगत बातचीत से जोड़ा गया तो वोटर टर्नआउट बढ़ेगा और बीजेपी को फायदा होगा. यही वजह है कि 10 युवाओं की टीम में युवतियों की संख्या ज्यादा रखी जा रही है. वोटिंग से ठीक पहले ये युवा पूरे इलाके में घूमेंगे और लोगों को समझाएंगे कि नोटा देकर कोई फायदा नहीं. इसके बजाय बीजेपी को वोट देने से सड़क, बिजली, रोजगार और समग्र विकास तेजी से होगा. छोटे-छोटे मुद्दों पर बात करके वे वोटरों को कन्विंस करेंगे. पार्टी का लक्ष्य है कि कोई भी वोट बर्बाद न हो.

हर बूथ पर क्विक रेस्पॉन्स टीम यानी क्यूआरटी भी बनाई जा रही है. इन 10 युवाओं का काम क्यूआरटी के साथ भी समन्वय रखना है. कोई भी आपात स्थिति जैसे वोटिंग में गड़बड़ी, झड़प या अन्य समस्या हो तो तुरंत सूचना देंगे और कार्रवाई कराएंगे. शांतिपूर्ण और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए ये टीम जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त चुनाव आयोग के केंद्रीय पर्यवेक्षक से भी संपर्क करेगी. मतलब साफ है - बूथ स्तर पर इतनी मजबूत पकड़ कि कोई गड़बड़ करने की हिम्मत ही न कर सके.

पार्टी के अंदरूनी सूत्र मानते हैं कि बंगाल में टीएमसी के खिलाफ लड़ाई आसान नहीं है. लेकिन अगर यह फॉर्मूला सही तरीके से लागू हुआ तो हर बूथ पर मजबूत उपस्थिति बनेगी. युवाओं की इस टीम से न सिर्फ वोटिंग प्रतिशत बढ़ेगा बल्कि पार्टी की छवि भी युवा और महिलाओं के बीच मजबूत होगी. 23 अप्रैल का पहला चरण इसी प्लान का परीक्षण होगा. 2014 में इस फॉर्मूले ने केंद्र बदल दिया. अब बंगाल में भी उसी भरोसे के साथ काम चल रहा है. युवा-युवतियां तैयार हैं, बूथ तैयार हैं, रणनीति तैयार है. बस अब देखना यह है कि वोटर इस प्लान को कितना पसंद करते हैं. अगर सफल हुआ तो बीजेपी का बंगाल में कमबैक तय माना जा रहा है.