₹11 लाख पूंजी वाली कंपनी से ₹22,500 करोड़ का निवेश? तेजस्वी यादव ने सम्राट सरकार पर साधा निशाना, बोले- ‘ये कैसा निवेश मॉडल?’
Bihar news: बिहार में निवेश को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी टकराव तेज हो गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार द्वारा हाल में किए गए निवेश संबंधी MoU पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए तेजस्वी ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधते हुए इन समझौतों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाया।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि बिहार सरकार के उद्योग विभाग और विभिन्न औद्योगिक समूहों के बीच करीब 51,500 करोड़ रुपये के निवेश के MoU को लेकर प्रचार किया जा रहा है। उन्होंने सवाल किया कि वर्ष 2024, 2025 और उससे पहले किए गए दो लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौतों का क्या हुआ और उनकी मौजूदा स्थिति की रिपोर्ट सरकार सार्वजनिक क्यों नहीं कर रही है।
₹11 लाख की पूंजी, 22,500 करोड़ के निवेश का दावा
तेजस्वी यादव ने एक कंपनी का हवाला देते हुए सरकार के निवेश मॉडल पर सवाल उठाया। उनका दावा है कि जिस कंपनी को परमाणु क्षेत्र में करीब 22,500 करोड़ रुपये के निवेश से जोड़ा जा रहा है, उसकी स्थापना कुछ महीने पहले ही हुई है और कंपनी की कुल पूंजी करीब 11 लाख रुपये बताई जा रही है।
उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी कम पूंजी वाली कंपनी बिहार में हजारों करोड़ रुपये का निवेश कैसे करेगी और उसके पास इतनी बड़ी परियोजना के लिए वित्तीय संसाधन कहां से आएंगे। तेजस्वी ने सरकार से इस पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
‘कागजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने की कोशिश न हो’
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि निवेश के नाम पर अगर कंपनियों को सस्ती जमीन, सरकारी अनुदान या अन्य सुविधाएं दी जाती हैं और बाद में परियोजनाएं धरातल पर नहीं उतरतीं, तो इससे बिहार के संसाधनों का नुकसान होगा।
उन्होंने कहा कि बड़ी और विश्वसनीय कंपनियां बिहार में उद्योग स्थापित करती हैं और अपनी पूंजी लगाती हैं तो विपक्ष उनका स्वागत करेगा तथा ऐसी कंपनियों को हरसंभव सहयोग मिलना चाहिए। लेकिन केवल कागजों पर बड़े निवेश का दावा कर सरकारी सुविधाओं का लाभ लेने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।
पुराने MoU की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी
तेजस्वी यादव ने सरकार से पुराने निवेश समझौतों की स्थिति स्पष्ट करने की मांग करते हुए पूछा कि पूर्व में किए गए बड़े-बड़े MoU में कितने वास्तव में जमीन पर उतरे और कितने अब भी सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।
उन्होंने कहा कि बिहार में बड़े उद्योग आने के लिए राज्य की आधारभूत संरचना और सरकारी व्यवस्था पर निवेशकों का भरोसा मजबूत होना जरूरी है। उनके मुताबिक सरकार को केवल प्रचार पर ध्यान देने के बजाय यह बताना चाहिए कि घोषित निवेश में से कितना वास्तविक रूप से बिहार में आया है।
‘प्रचार से नहीं सुधरेंगे हालात’
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी प्रचार के जरिए उपलब्धियां गिनाई जा सकती हैं, लेकिन इससे जमीनी समस्याएं खत्म नहीं होंगी। उन्होंने सरकार की नीतियों को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि बिहार में रोजगार, उद्योग और निवेश के लिए ठोस काम की जरूरत है।
तेजस्वी के इस बयान के बाद बिहार में निवेश और MoU को लेकर सियासत और गरमाने के आसार हैं। अब सरकार की ओर से इन आरोपों और संबंधित कंपनियों की वित्तीय क्षमता को लेकर क्या स्पष्टीकरण दिया जाता है, इस पर सबकी नजर रहेगी।







