बिहार में बढ़ सकती हैं 20 नई लोकसभा सीटें! परिसीमन के ड्राफ्ट से सियासत गरमाई, 10 सीटों के तीन हिस्से करने का प्रस्ताव
Newshaat Desk: देश में परिसीमन को लेकर चल रही बहस के बीच बिहार की राजनीति में हलचल मचाने वाला एक नया प्रस्ताव सामने आया है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के एक वर्किंग पेपर ड्राफ्ट में बिहार की 10 प्रमुख लोकसभा सीटों के पुनर्गठन का सुझाव दिया गया है। यदि यह प्रस्ताव भविष्य में कानून का रूप लेता है, तो बिहार की लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हो सकती है। यानी राज्य को 20 अतिरिक्त सांसद मिलने का रास्ता खुल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, इस मसौदे को आगामी संसद के मानसून सत्र में संशोधित विधेयक के रूप में पेश किए जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी इस पर कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और इसे लागू करने के लिए संसद की मंजूरी आवश्यक होगी।
10 सीटों को तीन हिस्सों में बांटने का सुझाव
ड्राफ्ट के मुताबिक पटना साहिब, पाटलिपुत्र, आरा, मुंगेर, बेगूसराय, सारण, दरभंगा, मधुबनी, झंझारपुर और महाराजगंज लोकसभा सीटों को तीन-तीन हिस्सों में विभाजित करने का प्रस्ताव है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो इन 10 सीटों से मौजूदा 10 सांसदों की जगह 30 सांसद लोकसभा पहुंचेंगे।
पूरे देश में 281 नई सीटों का प्रस्ताव
वर्किंग पेपर में देशभर में 281 नई लोकसभा सीटें जोड़ने की सिफारिश की गई है। इसके बाद लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 से बढ़कर 824 हो सकती है। इसे भारत के संसदीय इतिहास का सबसे बड़ा पुनर्गठन माना जा रहा है।
सिर्फ आबादी नहीं, कई मानकों पर होगा परिसीमन
आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य शमिका रवि द्वारा तैयार इस मॉडल में केवल जनसंख्या को आधार नहीं बनाया गया है। ड्राफ्ट में संसदीय क्षेत्रों के भौगोलिक आकार, शहरी आबादी, अनुसूचित जाति एवं जनजाति की जनसंख्या, भाषाई विविधता, मतदान केंद्रों की संख्या और चुनावी भागीदारी जैसे कई मानकों को शामिल किया गया है। साथ ही 2009 से 2024 तक के लोकसभा चुनावों के आंकड़ों और सामाजिक-राजनीतिक समीकरणों का भी अध्ययन किया गया है।
झारखंड में भी बढ़ सकती हैं सीटें
प्रस्ताव में झारखंड के संसदीय नक्शे में भी बदलाव का सुझाव दिया गया है। राजमहल सीट को दो हिस्सों में, जबकि गिरिडीह, लोहरदगा और गोड्डा लोकसभा सीटों को तीन-तीन भागों में विभाजित करने की अनुशंसा की गई है। इससे झारखंड की लोकसभा सीटों की संख्या 14 से बढ़कर 21 हो सकती है।
बिहार से जुड़ा है ड्राफ्ट तैयार करने वाली विशेषज्ञ का रिश्ता
इस प्रस्ताव की एक खास बात यह भी है कि इसे तैयार करने वाली शमिका रवि का संबंध बिहार से है। वह पटना जिले के बिहटा प्रखंड के डिहरी गांव की मूल निवासी हैं। ऐसे में यह मसौदा बिहार में राजनीतिक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है।
फिलहाल यह केवल एक वर्किंग पेपर है और इस पर कोई अंतिम सरकारी फैसला नहीं हुआ है। लेकिन यदि भविष्य में यह प्रस्ताव अमल में आता है, तो बिहार की चुनावी राजनीति, संसदीय प्रतिनिधित्व और जातीय-राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।







