बिहार में कड़ाके की ठंड बनी जानलेवा- 3 दिनों में 25 मौतें, अस्पतालों में मचा हाहाकार
Bihar news: बिहार में जारी भीषण ठंड अब सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि लोगों की जान पर भारी पड़ने लगी है। तापमान में लगातार गिरावट के कारण जनजीवन तो प्रभावित है ही, अब इसका सीधा असर लोगों की सेहत पर भी दिखने लगा है। हालात ऐसे हैं कि पिछले तीन दिनों में हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज और सांस संबंधी बीमारियों से 25 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि अस्पतालों में मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सरकारी अस्पतालों पर बढ़ा दबाव
पटना के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। हार्ट अटैक, ब्रेन हेमरेज और सीओपीडी के मरीजों से वार्ड खचाखच भरे हैं। आईसीयू और एचडीयू पूरी तरह फुल हो चुके हैं, वहीं इमरजेंसी वार्ड में भी बेड की भारी कमी है। मजबूरी में कई गंभीर मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
बरामदे और हॉल बने वार्ड
पीएमसीएच और आईजीआईसी अस्पताल में स्थिति सबसे ज्यादा चिंताजनक है। यहां मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि बरामदे और हॉल में ट्रॉली पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि जिन मरीजों की हालत स्थिर हो जाती है, उन्हें अन्य अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है, ताकि गंभीर मरीजों के लिए जगह बनाई जा सके।
30 फीसदी तक बढ़े गंभीर मामले
डॉक्टरों के मुताबिक, ठंड के कारण हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज के मामलों में करीब 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पीएमसीएच में बीते तीन दिनों में हार्ट अटैक और ब्रेन हेमरेज से 15 मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि 25 से अधिक मरीजों का इलाज अभी जारी है। वहीं आईजीआईसी में इसी अवधि में 120 मरीज भर्ती हुए, जिनमें 10 से ज्यादा की जान चली गई।
क्यों बन रही ठंड जानलेवा
चिकित्सकों का कहना है कि कम तापमान में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ जाती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है। यही स्थिति स्ट्रोक, हार्ट अटैक और हार्ट फेल्योर का कारण बन रही है। डॉक्टरों ने खासतौर पर हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, शुगर और सांस के मरीजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने, ठंड से बचाव करने और नियमित दवाइयों में लापरवाही न करने की सलाह दी है।
आपको बता दें कि, बिहार में ठंड का यह दौर न सिर्फ चुनौतीपूर्ण है, बल्कि लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।







