‘56 साल का सियासी मिथक टूटा’: डिप्टी CM से CM बने सम्राट चौधरी, बिहार में BJP युग की ऐतिहासिक शुरुआत
उन्हें राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। यह पहला मौका है जब भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता बिहार में अपने दम पर मुख्यमंत्री बना है।
मिथक टूटा, इतिहास बदला
बिहार की राजनीति में अब तक कई बड़े चेहरे डिप्टी सीएम बने, लेकिन मुख्यमंत्री की कुर्सी तक नहीं पहुंच सके। अनुग्रह नारायण सिंहा से लेकर सुशील कुमार मोदी और तेजश्वी यादव जैसे नेताओं के नाम इस सूची में शामिल हैं।
इतिहास में आखिरी बार कर्पूरी ठाकुर ने 1967 में डिप्टी सीएम बनने के बाद 1970 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी। उसके बाद यह सिलसिला जैसे थम सा गया था लेकिन अब सम्राट चौधरी ने इस परंपरा को तोड़ दिया है।
संघर्ष से सत्ता के शिखर तक
दो बार डिप्टी सीएम की जिम्मेदारी निभाने के बाद सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना उनके लंबे राजनीतिक संघर्ष और आक्रामक शैली का परिणाम माना जा रहा है। यह सिर्फ एक पद परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में ‘पावर शिफ्ट’ का संकेत है।
BJP के लिए ऐतिहासिक क्षण
इस शपथ के साथ ही बिहार में भाजपा नेतृत्व वाली सरकार की औपचारिक शुरुआत हो गई है। यह बदलाव राज्य की राजनीति में नए समीकरण और नई दिशा तय करने वाला माना जा रहा है।
सम्राट चौधरी का मुख्यमंत्री बनना सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में एक बड़ी सोच के बदलने का प्रतीक है जहां अब पुराने मिथक टूट रहे हैं और नई राजनीति की नींव रखी जा रही है। अब सबकी नजर उनके फैसलों और नेतृत्व पर टिकी है, जो तय करेगा कि यह ‘नई शुरुआत’ बिहार को किस दिशा में ले जाएगी।







