17 सूत्री मांगों पर अड़े राजस्व कर्मचारी: सुपौल में अनिश्चितकालीन हड़ताल से 68 सरकारी सेवाएं ठप
पहले टली, अब फिर भड़की हड़ताल
बताया जा रहा है कि यह आंदोलन फरवरी से ही जारी था, लेकिन चुनावी प्रक्रिया के चलते इसे कुछ समय के लिए रोक दिया गया था। चुनाव खत्म होने के बाद कर्मचारियों ने काम तो शुरू किया, लेकिन जब उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं हुई, तो उन्होंने फिर से आंदोलन का रास्ता अपना लिया।
वादे हुए, लेकिन आदेश नहीं
राजस्व कर्मचारी आनंद कुमार गुप्ता के मुताबिक, उनकी मांगों को लेकर सरकार के साथ तीन दौर की वार्ता हो चुकी है। इन बैठकों में स्नातक योग्यता तय करने, ग्रेड पे 2800 और लेवल-5 लागू करने जैसे कई अहम मुद्दों पर सहमति बनी थी। बावजूद इसके, करीब आठ महीने बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।
‘दोहरी नीति’ का आरोप, कर्मचारियों में नाराजगी
कर्मचारियों ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि मौजूदा स्थिति में वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने में भी कठिनाई महसूस कर रहे हैं। साथ ही, ट्रांसफर-पोस्टिंग नियमों की अनदेखी कर कई कर्मचारियों को 100 से 150 किलोमीटर दूर तक भेजा गया है, जिससे उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं।
जनता पर सीधा असर, कामकाज ठप
इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर आम लोगों पर पड़ रहा है। दाखिल-खारिज, परिमार्जन समेत विभाग के 68 तरह के जरूरी काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी भटकना पड़ रहा है।
मांगें पूरी नहीं तो आंदोलन जारी
राजस्व कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन और आम जनता, दोनों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट: पियूष राज, सुपौल







