Newshaat_Logo

बिहार में अपराधियों पर शिकंजा, 64,733 मामलों में 86,760 दोषियों को सजा; जल्द बदलेगी पुलिसिंग की व्यवस्था

 
बिहार में अपराधियों पर शिकंजा, 64,733 मामलों में 86,760 दोषियों को सजा; जल्द बदलेगी पुलिसिंग की व्यवस्था

Bihar news: बिहार में अपराध नियंत्रण और दोषियों को सजा दिलाने की कार्रवाई में तेजी आई है। गृह विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने शुक्रवार को सूचना भवन में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि इस वर्ष मई तक 64,733 मामलों में 86,760 अभियुक्तों को सजा सुनाई गई है। इनमें दो को मृत्युदंड, 553 को आजीवन कारावास और अन्य दोषियों को अलग-अलग अवधि की सजा मिली है।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में दोषियों को सजा दिलाने की दर में 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। वहीं, राज्य में पारंपरिक अपराधों में भी कमी दर्ज की गई है। हत्या के मामलों में 10.1 प्रतिशत, डकैती में 31.32 प्रतिशत और दंगा के मामलों में 18.97 प्रतिशत की गिरावट बताई गई है।

बिहार नक्सलवाद से मुक्त, चार जिले अब भी निगरानी में

गृह सचिव ने दावा किया कि लगातार चलाए गए नक्सल विरोधी अभियानों के बाद बिहार का कोई भी जिला वर्तमान में नक्सल प्रभावित नहीं है। उन्होंने बताया कि 2013 में राज्य के 22 जिले नक्सल प्रभावित थे। हालांकि औरंगाबाद, गया, जमुई और लखीसराय को केंद्र सरकार ने लीगेसी एवं थ्रस्ट जिलों के रूप में चिन्हित किया है। इन इलाकों में विकास कार्यों पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

इस वर्ष अब तक नक्सलियों के साथ मुठभेड़ की कोई घटना नहीं हुई है, जबकि 58 नक्सलियों की गिरफ्तारी की गई है।

डीजीपी बोले- हत्या के मामलों में आई बड़ी गिरावट

डीजीपी विनय कुमार ने कहा कि 1990 के दशक में बिहार में हर साल करीब 6 से 6.5 हजार हत्याएं होती थीं। अब यह आंकड़ा घटकर करीब 2,000 से 2,400 के बीच रह गया है। वर्तमान में हत्या के प्रमुख कारणों में प्रेम प्रसंग, जमीन विवाद और कारोबारी विवाद सामने आ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस वर्ष जून तक दो लाख से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि पिछले साल करीब 3.85 लाख गिरफ्तारियां हुई थीं।

पुलिस दीदी को मिलेंगी 1500 स्कूटी, जवानों के लिए 3100 बाइक

पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए जल्द ही 1500 पुलिस दीदी को स्कूटी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा अगले दो से तीन महीनों में पुलिसकर्मियों को 3100 मोटरसाइकिल देने की तैयारी है।

डीजीपी ने यह भी बताया कि बिहार में पुलिस बल की संख्या बढ़कर 1.21 लाख हो गई है। इस वर्ष अब तक 22 हजार से अधिक सिपाहियों की नियुक्ति हो चुकी है। 19,800 सिपाहियों का प्रशिक्षण 17 अगस्त से शुरू होगा, जबकि चालक सिपाही समेत करीब 26 हजार पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जारी है।

रेंज व्यवस्था खत्म, फिर लागू होगी जोनल पुलिसिंग

बिहार में पुलिसिंग व्यवस्था में भी बदलाव की तैयारी है। डीजीपी ने बताया कि मौजूदा पुलिस रेंज व्यवस्था को हटाकर पहले की तरह जोनल व्यवस्था लागू करने की कवायद शुरू कर दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे पुलिसिंग को और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

साइबर अपराध पर भी पुलिस का फोकस

डीजीपी ने साइबर अपराध को बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि बिहार के सभी जिलों में साइबर थाने काम कर रहे हैं। इस वर्ष जुलाई तक साइबर प्रहार अभियान के तहत 193 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, साइबर थानों में अब तक 2,942 मामले दर्ज हुए हैं और 522 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है।

ठगी की रकम में से करीब 16 प्रतिशत राशि रिकवर कर पीड़ितों को लौटाई जा रही है, जिसे बिहार की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना गया।

50 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मियों की नियुक्ति

डीजीपी ने बताया कि पिछले डेढ़ साल में 50 हजार से अधिक सिपाहियों की नियुक्ति की जा चुकी है। यह राज्य के कुल पुलिस बल का करीब 40 प्रतिशत है। आने वाले समय में पुलिस बल को और मजबूत करने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

प्रेस वार्ता में एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार, गृह विभाग के विशेष सचिव क्षत्रनिल सिंह और एडीजी विधि-व्यवस्था के सुहिता अनुपम समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।