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अपराधियों के हौसले बुलंद: कुशवाहा के करीबी के बाद अब तेजस्वी के करीबी को भून दिया
पहले भी कई राजनेता रहे हैं अपराधियों के निशाने पर, 2018 से ऐसी कई घटनाओं को दिया जा चूका है अंजाम  
 

बिहार में अपराधियों के हौसले इन दिनों काफी बुलंद हैं. साल 2018 से अभी तक कई राजनेताओं को अपराधियों ने निशाना बनाया है. गुरुवार रात को गोपालगंज में भी एक ऐसी ही घटना को अंजाम दिया गया. शादी समारोह से लौटते वक्त आरजेडी नेता डॉ. राम इकबाल यादव को अपराधियों ने गोलियों से भून दिया. बताया जाता है कि राम इकबाल यादव तेजस्वी यादव के काफी करीब थे. तेजस्वी उन्हें निजी तौर पर भी जानते थे.

Tejashwi

घटना मीरगंज थाना क्षेत्र के राजघाट गांव स्थित उनके घर के पास की ही है. बाइक सवार अज्ञात अपराधियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की और मौत के घाट उतार दिया. स्थानीय लोगों के मुताबिक घटनास्थल पर ही डॉ. राम इकबाल यादव की मौत हो गई. 

घटना की सूचना मिलने के बाद मौके पर पुलिस पहुंची. आसपास के लोगों से और परिजनों से भी घटना को लेकर पूछताछ की. इसके बाद पुलिस ने मृतक डॉ. राम इकबाल यादव के शव का पोस्टमार्टम कराने के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. राम इकबाल यादव सारण प्रमंडल की छात्र इकाई के अध्यक्ष थे. तेजस्वी यादव के बेहद करीबी थे. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव उन्हें निजी तौर पर भी जानते थे.

परिजनों के मुताबिक डॉ. राम इकबाल यादव बीती रात बाइक से शादी समारोह में शामिल होकर घर लौट रहे थे. इसी दौरान पहले से घात लगाए अपराधियों ने घर के समीप ताबड़तोड़ फायरिंग कर गोलियों से छलनी कर दिया. वारदात के बाद हवाई फायरिंग करते हुए अपराधी फरार हो गए.

Ram Iqbal Yadav

घटना की सूचना पाकर काफी संख्या में ग्रामीण वहां पहुंच गए. आनन-फानन में आरजेडी नेता को इलाज के लिए लेकर लोग हथुआ अनुमंडलीय अस्पताल गए जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया. बताया जाता है कि आरजेडी नेता को तीन गोली लगी है. हत्या के पीछे पुरानी दुश्मनी की बात बताई जा रही है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी में जुट गई है.

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करीब एक महीने पहले ही राजधानी से सटे दानापुर में जदयू नेता और  दानापुर नगर परिषद के उपाध्‍यक्ष दीपक कुमार मेहता की हत्‍या कर दी गई थी. इस हत्या के बाद बिहार के लोगों में उबाल देखा जा रहा था. यह उबाल अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब गोपालगंज में राजद नेता को गोलियों से छल्ली कर दिया गया है. यह बिहार में अपराधियों के बड़े हुए मनोबल को साफ तौर पर दर्शाता है. वहीं पिछले कुछ सालों में देखें तो 2018 में कई नेताओं की हत्‍या कर दी गई. 12 मई को पटना में राजद नेता दीनानाथ की दिनदहाड़े गोली मार कर हत्‍या कर दी गई. इसके बाद छह जुलाई को नवादा में राजद नेता कैलाश पासवान की हत्‍या भी अपराधियों ने गोली मारकर कर दी थी. 16 जुलाई को सिवान में रालोसपा नेता संजय साह को हत्‍यारों ने गोलियों से भून दिया था. इसके बाद 13 अगस्‍त को रालोसपा के एक और नेता मनीष सहनी की हत्‍या वैशाली में कर दी गई. भोजपुर में माले नेता रमाकांत राम को 27 अगस्‍त को मार डाला गया. 14 सितंबर को गोपालगंज में जदयू नेता उपेंद्र सिंह की हत्‍या कर दी गई.

मुजफ्फरपुर में वहां के कद्दावर नेता और पूर्व मेयर कांग्रेस नेता समीर कुमार को 24 सितंबर को अपरा‍धियों ने छलनी कर दिया था। इसके बाद रालोसपा के एक और नेता अमित भूषण की पटना में 14 नवंबर को हत्‍या कर दी गई। इसके बाद अपराधियों ने एक और रालोसपा नेता को निशाना बनाया। 30 नवंबर को पूूूर्वी चंपारण के प्रमोद कुशवाहा की जान ले ली। वर्ष जाते-जाते दिसंबर में पटना में भाजपा नेता और बिहार के बड़े व्‍यवसायी गुंजन खेमका की हत्‍या कर दी गई थी।    

चार अक्‍टूबर 2020 की सुबह राजद के एससी-एसटी प्रकोष्‍ठ के प्रदेश सचिव रहे शक्ति मल्लिक की घर में घुसकर हत्‍या कर दी गई। इससे पहले पूर्णिया में ही 30 अप्रैल की रात लोजपा नेेता अनिल उरांव की गला दबाकर जान ले ली गई। सिवान में 12 जनवरी को जामो थाना क्षेत्र के सुल्‍तानपुर खुर्द निवासी भाजपा नेता जनार्दन सिंह पर अंधाधुंध फायरिंग कर बदमाशों ने मौत के घाट उतार दिया। 2022 में भी सिलसिला थमा नहीं। 16 फरवरी को समस्‍तीपुर में जदयू नेता खलील रिजवी की हत्‍या कर दी गई।