बिहार में निवेश का बड़ा रोडमैप तैयार, सम्राट चौधरी ने उद्योगपतियों को दिया भरोसा; गडकरी बोले- केंद्र देगा पूरा सहयोग
Bihar News: बिहार में निवेश और उद्योगों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गुरुवार को पटना के ताज सिटी सेंटर में Rising Bihar Investor Summit 2026 का आगाज हुआ। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, उद्योग मंत्री श्रेयसी सिंह और पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र ने संयुक्त रूप से समिट का उद्घाटन किया। समिट का फोकस बिहार में निवेश के नए अवसर, उद्योगों के लिए आधारभूत ढांचा और रोजगार की संभावनाओं पर रहा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निवेशकों को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार अब निवेश के लिए तैयार है। सरकार उद्योगों की जरूरत के हिसाब से सड़क, बिजली, पानी और दूसरी सुविधाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। उन्होंने उद्योग जगत से बिहार में निवेश करने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया कि निवेशकों को सरकार की ओर से जरूरी सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
बिहार को सिर्फ विरासत नहीं, बड़ा बाजार भी बताया
मुख्यमंत्री ने बिहार की पहचान को सिर्फ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने नालंदा, विक्रमशिला, मगध और पाटलिपुत्र के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि बिहार लंबे समय से ज्ञान और आर्थिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
उन्होंने राज्य की बड़ी आबादी को आर्थिक अवसर के तौर पर देखने की बात कही। मुख्यमंत्री के मुताबिक करीब 14 करोड़ की आबादी वाला बिहार एक बड़ा बाजार है और सरकार का लक्ष्य इसी क्षमता को उद्योग और रोजगार के अवसरों में बदलना है।
समिट का उद्देश्य निवेशकों, उद्योग जगत, उद्यमियों और सरकार को एक मंच पर लाकर राज्य में निवेश की संभावनाओं और औद्योगिक विकास पर चर्चा करना है।
सड़क से बिजली तक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जोर
सम्राट चौधरी ने कहा कि किसी भी उद्योग के लिए सड़क, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं सबसे जरूरी होती हैं। बिहार में सड़क नेटवर्क के विस्तार के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेस-वे से जुड़ी परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि बिहार में सड़कों का नेटवर्क पहले के मुकाबले काफी बढ़ा है। उनके अनुसार पहले करीब 8 हजार किलोमीटर सड़क नेटवर्क था, जो अब लगभग 1.5 लाख किलोमीटर तक पहुंच गया है।
बिजली के क्षेत्र में भी मुख्यमंत्री ने बड़े बदलाव का दावा किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में राज्य में बिजली की उपलब्धता करीब 500 मेगावाट थी, जबकि अब यह 10 हजार मेगावाट से ज्यादा हो चुकी है। सरकार आने वाले पांच वर्षों में इसे बढ़ाकर 20 हजार मेगावाट करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है।
बाढ़ और जल प्रबंधन को उद्योग से जोड़ा
निवेश सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने बिहार की बाढ़ की समस्या को भी विकास और उद्योग से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि नेपाल और पड़ोसी राज्यों से आने वाले पानी के कारण हर साल बिहार के कई इलाकों को बाढ़ का सामना करना पड़ता है।
गंगा, कोसी और गंडक जैसी नदियों के जल प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक योजना की जरूरत पर उन्होंने जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कोसी क्षेत्र में औद्योगिक कॉरिडोर, टाउनशिप और दूसरी विकास परियोजनाओं की संभावनाओं का भी उल्लेख किया।
उनके मुताबिक पानी के बेहतर प्रबंधन से केवल बाढ़ की समस्या से निपटने में मदद नहीं मिलेगी, बल्कि कृषि, उद्योग और पर्यटन तीनों क्षेत्रों को फायदा पहुंचाया जा सकता है।
दक्षिण बिहार के लिए भी जल योजना का जिक्र
मुख्यमंत्री ने दक्षिण बिहार के सूखाग्रस्त क्षेत्रों की समस्या का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय गंगा के पानी का इस्तेमाल पेयजल और सिंचाई के लिए करने की दिशा में सरकार काम कर रही है।
इसके साथ ही पहली बार राज्य में गाद नीति तैयार किए जाने की बात कही गई। मुख्यमंत्री के मुताबिक नदियों से निकलने वाली गाद और मिट्टी का इस्तेमाल सड़क निर्माण समेत दूसरे विकास कार्यों में किया जा सकेगा। इससे निर्माण की लागत कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
किसानों के लिए सोलर कृषि फीडर
सम्राट चौधरी ने कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की योजना भी बताई। इसका उद्देश्य किसानों को दिन के समय पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना और बिजली सब्सिडी के बोझ को कम करना है।
सरकार की योजना कृषि क्षेत्र में बिजली की उपलब्धता को अधिक भरोसेमंद बनाने के साथ-साथ सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने की है।
बिहार में बने उत्पादों की सरकारी खरीद पर जोर
निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री ने सरकारी खरीद नीति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बिहार में स्थापित उद्योगों के उत्पाद अगर तय मानकों पर खरे उतरते हैं तो सरकारी खरीद में उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बिहार में बने उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम करेगी। उन्होंने सरकारी खरीद नीति में जरूरी बदलाव किए जाने की बात कही।
होटल और पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाएं
समिट में पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को भी संभावनाओं वाले क्षेत्रों में शामिल किया गया। मुख्यमंत्री ने पटना, गया समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में होटल, पर्यटन और ईको-टूरिज्म परियोजनाओं को बढ़ावा देने की बात कही।
बिहार के बौद्ध, जैन, सिख और प्राचीन ज्ञान परंपरा से जुड़े स्थलों को देखते हुए पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया।
पटना से सोनपुर तक रोप-वे की पहल
मुख्यमंत्री ने राज्य में नए परिवहन विकल्पों की योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने पटना से गंगा नदी के ऊपर होते हुए सोनपुर के बाबा हरिहरनाथ मंदिर तक रोप-वे परियोजना शुरू करने की दिशा में पहल किए जाने की जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि बिहार में आधारभूत ढांचे, उद्योग और रोजगार को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, ताकि रोजगार के लिए दूसरे राज्यों का रुख करने वाले लोगों को अपने राज्य में ही अवसर मिल सकें।
नितिन गडकरी ने कहा- बिहार के विकास में केंद्र देगा पूरा सहयोग
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने समिट में बिहार के विकास को लेकर केंद्र के सहयोग की बात कही। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य में हो रहे काम की सराहना की और कहा कि उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति से आने वाले समय में बिहार के विकास को गति मिल सकती है।
गडकरी ने कहा कि बिहार के विकास में केंद्र सरकार की ओर से पूरा सहयोग दिया जाएगा। इससे पहले उनके पटना दौरे के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की समीक्षा और राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरतों पर चर्चा का कार्यक्रम भी तय था।
निवेश के जरिए रोजगार बढ़ाने पर सरकार का फोकस
Rising Bihar Investor Summit का मूल फोकस निवेश को जमीन पर उतारने और उद्योगों के जरिए रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है। आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार समिट में उद्योग, ऊर्जा, शहरी विकास, सड़क-कनेक्टिविटी, कृषि-फूड प्रोसेसिंग और IT/ITeS जैसे क्षेत्रों पर निवेश के अवसरों को सामने रखा जा रहा है।
सरकार की ओर से निवेशकों को यह संदेश दिया गया कि बिहार में उपलब्ध बाजार, मानव संसाधन और बढ़ते इंफ्रास्ट्रक्चर को औद्योगिक विकास से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।







