बिहार में ‘केश कला बोर्ड’ बनाने की उठी मांग, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार को सौंपा गया ज्ञापन
Bihar News: बिहार में नाई (केशशिल्पकार) समाज के सामाजिक और आर्थिक विकास को लेकर ‘केश कला बोर्ड’ के गठन की मांग तेज हो गई है। बुधवार को मुख्य संयोजक संदीप ठाकुर के नेतृत्व में एक शिष्टमंडल ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार से मुलाकात कर उन्हें इस संबंध में ज्ञापन सौंपा।
बोर्ड गठन की जरूरत बताई
विधानसभा परिसर स्थित अध्यक्ष के कार्यालय में हुई मुलाकात के दौरान शिष्टमंडल ने कहा कि बिहार में बड़ी संख्या में केशशिल्पकार समाज के लोग पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े हैं, लेकिन उनके विकास और कल्याण के लिए राज्य में अब तक कोई अलग बोर्ड नहीं बनाया गया है।
उन्होंने बताया कि हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में पहले से केश कला बोर्ड कार्यरत हैं, जिससे वहां के लोगों को प्रशिक्षण, स्वरोजगार और सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
युवाओं को मिलेगा रोजगार और प्रशिक्षण
ज्ञापन में कहा गया कि यदि बिहार में भी केश कला बोर्ड का गठन होता है तो युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण, कम ब्याज पर ऋण, अत्याधुनिक उपकरण और स्वरोजगार के नए अवसर मिल सकेंगे।
इसके अलावा समाज के लोगों को बीमा, पेंशन, स्वास्थ्य सहायता और दुर्घटना सहायता जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ भी प्रभावी ढंग से मिल सकेगा।
छात्रवृत्ति और पारंपरिक कला के संरक्षण की भी मांग
शिष्टमंडल ने मांग की कि आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की व्यवस्था की जाए। साथ ही केशशिल्प की पारंपरिक कला के संरक्षण और सरकार तथा समाज के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए भी बोर्ड का गठन जरूरी है।
नाई महासम्मेलन में भी उठी थी मांग
मुख्य संयोजक संदीप ठाकुर ने बताया कि 13 जून 2026 को पटना के रविंद्र भवन में आयोजित अखिल भारतीय नाई महासम्मेलन में भी हजारों प्रतिनिधियों ने केश कला बोर्ड बनाने की मांग उठाई थी। सम्मेलन में समाज के आर्थिक और सामाजिक उत्थान के लिए इस दिशा में ठोस पहल की जरूरत पर जोर दिया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष ने दिया सकारात्मक आश्वासन
विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने शिष्टमंडल की मांगों को ध्यान से सुना और कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों के विकास से जुड़े मुद्दों पर सकारात्मक सोच के साथ विचार होना चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मांग और सुझाव को संबंधित विभागों के पास विचार के लिए भेजा जाएगा, ताकि समाज के हितों की रक्षा और उनके समुचित विकास की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जा सकें।







