खेती का नया चेहरा: बिहार में ड्रैगन फ्रूट और रबड़ से ‘हरियाली’ नहीं, अब ‘कमाई’ उग रही है
• वैज्ञानिक प्रयोग और किसानों की नई सोच से खुल रहे आय के नए रास्ते
• पारंपरिक खेती से हटकर हाई-वैल्यू फसलों की ओर बढ़ रहा बिहार
अब बिहार के किसान परंपरा से हटकर हाई-वैल्यू खेती की ओर कदम बढ़ा रहे हैं, जहां ड्रैगन फ्रूट और रबड़ जैसे ‘असंभव’ माने जाने वाले प्रयोग भी सफल होते दिख रहे हैं।

मुंगेर में रबड़… नया प्रयोग, नई उम्मीद
मुंगेर में रबड़ की खेती ने सबको चौंका दिया है। यहां वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने मिलकर पायलट प्रोजेक्ट के तहत रबड़ के पौधे लगाए, जो महज कुछ महीनों में ही बेहतर विकास दिखा रहे हैं।
अगर यह प्रयोग पूरी तरह सफल होता है, तो बिहार के किसानों के लिए एक नया ‘कैश क्रॉप’ विकल्प तैयार होगा, जो अब तक दक्षिण भारत तक सीमित माना जाता था।
कटिहार का किसान बना मिसाल
वहीं कटिहार के किसान अजीत मंडल ने ड्रैगन फ्रूट की खेती से सफलता की नई कहानी लिख दी है।

यूट्यूब और इंटरनेट से सीखकर उन्होंने इजरायली तकनीक अपनाई और अपने खेत को सालभर उत्पादन देने वाला मॉडल बना दिया। जहां आमतौर पर यह फसल 6 महीने तक सीमित रहती है, वहीं उनके खेतों में पूरे साल फल लग रहे हैं।
करीब 7 लाख के निवेश से शुरू हुई यह खेती अब उन्हें लाखों की कमाई दे रही है और आने वाले 15-20 वर्षों तक स्थायी आय का जरिया बन चुकी है।
वैज्ञानिक सोच + सरकारी मदद = नया मॉडल
इस बदलाव के पीछे तीन बड़ी ताकतें काम कर रही हैं:
• वैज्ञानिक शोध और प्रयोग
• सरकारी योजनाएं
• किसानों की बदलती सोच
राज्य सरकार भी ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों को बढ़ावा देने के लिए कई जिलों में अनुदान दे रही है, जिससे किसान पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर व्यवसायिक खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
बदलाव की ओर बढ़ता बिहार
आज बिहार के खेत सिर्फ अनाज नहीं उगा रहे, बल्कि नवाचार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक मजबूती की नई कहानी लिख रहे हैं। ड्रैगन फ्रूट और रबड़ जैसे प्रयोग यह साबित कर रहे हैं कि अगर सोच बदले और तकनीक साथ हो, तो खेती सिर्फ गुजारा नहीं-बड़ा बिजनेस भी बन सकती है।







