किसानों की कमाई बढ़ाने का नया फॉर्मूला! पटना में राष्ट्रीय मंथन के बाद ‘वन-स्टॉप PACS’ मॉडल पर बनी सहमति
यह कार्यशाला नीति आयोग, बिहार सरकार के सहकारिता विभाग और डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी, जिसमें देशभर के विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
पैक्स को मिलेगा नया स्वरूप
कार्यशाला में इस बात पर जोर दिया गया कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) अब सिर्फ ऋण देने तक सीमित न रहें, बल्कि उन्हें बहुउद्देशीय, आधुनिक और आत्मनिर्भर संस्थान बनाया जाए।
विशेषज्ञों ने बताया कि मूल्य संवर्धन, व्यवसायिक विविधीकरण और आधुनिक प्रबंधन के जरिए PACS किसानों की आय बढ़ाने का मजबूत माध्यम बन सकते हैं।
10 राज्यों के मॉडल से सीख
इस दौरान बिहार सहित कई राज्यों के सफल सहकारिता मॉडल साझा किए गए। अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधियों ने बताया कि कैसे स्थानीय संसाधनों, बाजार से जुड़ाव और तकनीक के इस्तेमाल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
आत्मनिर्भर बनने पर जोर
समापन सत्र में प्रो. रमेश चंद ने कहा कि सहकारी संस्थाओं को सरकारी सहयोग के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भी काम करना होगा। उन्होंने बाजार उन्मुख सोच और गुणवत्ता आधारित प्रबंधन को सफलता की कुंजी बताया।
डिजिटल से बढ़ेगी पारदर्शिता और कमाई
कार्यशाला में डिजिटल सशक्तिकरण पर खास जोर दिया गया। ERP सिस्टम, ई-नाम प्लेटफॉर्म और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए PACS को अधिक पारदर्शी और कुशल बनाने के सुझाव दिए गए।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकेत
कार्यशाला के निष्कर्षों से साफ है कि आने वाले समय में सहकारिता क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला है। PACS को मजबूत कर न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई रफ्तार मिलेगी। यह मंथन बिहार ही नहीं, बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए कृषि और सहकारिता के नए युग की शुरुआत का संकेत दे रहा है।







