Newshaat_Logo

ककोलत से गुणावां तक बनेगा नया पर्यटन सर्किट, एक ही सफर में झरना, जंगल और जैन तीर्थ के दर्शन

 
ककोलत से गुणावां तक बनेगा नया पर्यटन सर्किट, एक ही सफर में झरना, जंगल और जैन तीर्थ के दर्शन

Bihar news: नवादा में पर्यटन को नई दिशा देने की तैयारी शुरू हो गई है। जिले के प्रमुख प्राकृतिक, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को एक-दूसरे से जोड़कर नया पर्यटन परिपथ विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इस संभावित सर्किट में ककोलत जलप्रपात से लेकर गुणावां के जैन तीर्थ स्थल और नारदीगंज के सूर्य मंदिर समेत आसपास के अन्य प्रमुख स्थलों को शामिल किया जाएगा।

इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को केवल ककोलत जलप्रपात तक सीमित रखने के बजाय उन्हें नवादा के दूसरे आकर्षणों से भी जोड़ना है। इससे जिले में पर्यटकों के ठहरने की अवधि बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कारोबार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

ककोलत से शुरू होगी प्रकृति के बीच यात्रा

हरियाली और पहाड़ियों के बीच स्थित ककोलत जलप्रपात पहले से ही नवादा के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। गर्मी के मौसम में यहां बड़ी संख्या में सैलानी पहुंचते हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 में गर्मी के दौरान एक दिन में करीब 19 हजार पर्यटकों के ककोलत पहुंचने की जानकारी सामने आई थी। अप्रैल में भी यहां प्रतिदिन लगभग पांच हजार पर्यटकों के आने की बात सामने आई।

पर्यटकों की इस बढ़ती संख्या को देखते हुए ककोलत को आसपास के अन्य पर्यटन स्थलों से जोड़ने की कवायद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे एक ही यात्रा के दौरान पर्यटकों को प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों का अनुभव मिल सकेगा।

गुणावां के जैन तीर्थ से जुड़ेगा पर्यटन सर्किट

प्रस्तावित पर्यटन परिपथ में गुणावां स्थित जैन तीर्थ स्थल, जल मंदिर और धार्मिक परिसर को भी जोड़े जाने की तैयारी है। इसके अलावा नारदीगंज के आसपास मौजूद सूर्य मंदिर तथा अन्य प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थलों को भी सर्किट का हिस्सा बनाया जा सकता है।

इससे नवादा में ऐसा पर्यटन मार्ग तैयार करने की कोशिश होगी, जहां एक ओर ककोलत का झरना और पहाड़ पर्यटकों को आकर्षित करेंगे, वहीं दूसरी ओर धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी जगहें यात्रा को नया अनुभव देंगी।

पर्यटकों के साथ स्थानीय लोगों को भी फायदा

पर्यटन स्थलों को एक सर्किट में जोड़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचने की उम्मीद है। पर्यटकों के अधिक समय तक रुकने से होटल, होम-स्टे, स्थानीय परिवहन, खान-पान और छोटे कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।

स्थानीय युवाओं को गाइड, परिवहन और अन्य पर्यटन सेवाओं से जोड़ने की संभावना है। वहीं महिलाएं हस्तशिल्प, स्थानीय व्यंजन और पारंपरिक उत्पादों के जरिए अपनी आय बढ़ा सकती हैं।

सुविधाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोर

पर्यटन स्थलों के विकास के साथ पर्यटकों के लिए बुनियादी सुविधाएं बेहतर करने पर भी जोर रहेगा। इनमें स्वच्छता, पेयजल, पहुंच मार्ग, पार्किंग, बैठने की व्यवस्था और सूचना संबंधी साइनेज जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

चूंकि प्रस्तावित सर्किट में प्राकृतिक क्षेत्र भी शामिल होंगे, इसलिए इको-टूरिज्म के तहत पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। प्लास्टिक के इस्तेमाल पर नियंत्रण, कचरा प्रबंधन और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के जरिए पर्यटन विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया जाएगा।

नवादा को मिल सकती है नई पर्यटन पहचान

ककोलत की प्राकृतिक खूबसूरती, गुणावां की धार्मिक विरासत और सूर्य मंदिर जैसे स्थलों को एक साथ जोड़ने की योजना सफल होती है तो नवादा में पर्यटन का दायरा काफी व्यापक हो सकता है। इससे जिला केवल ककोलत जलप्रपात के लिए नहीं, बल्कि प्रकृति, आस्था और विरासत के संगम वाले पर्यटन गंतव्य के रूप में नई पहचान बना सकता है।