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पत्रकार से बदसलूकी का आरोप, सहरसा सदर अस्पताल विवाद में WJAI ने लिया संज्ञान

Saharsa: सदर अस्पताल में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार अभिषेक के साथ कथित गाली-गलौज, मारपीट और धमकी का वीडियो सामने आने का दावा किया जा रहा है. घटना को लेकर पत्रकार संगठन WJAIने भी संज्ञान लिया है. संगठन की ओर से मामले को गंभीर बताते हुए कार्रवाई की मांग की गई है. वीडियो और आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी.
 
BIHAR NEWS

सहरसा से सागर कुमार की रिपोर्ट

Saharsa: सहरसा सदर अस्पताल में बच्चों के इलाज के दौरान पत्रकारों और अस्पताल कर्मियों के बीच हुए विवाद ने अब तूल पकड़ लिया है। पत्रकार अभिषेक कुमार के रिपोर्टिंग के दौरान कथित गाली-गलौज, मारपीट और धमकी से जुड़ा वीडियो सामने आने की बात कही जा रही है। मामले को लेकर पत्रकार संगठन WJAI (Web Journalists Association of India) ने भी संज्ञान लिया है।

संगठन के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. अमित रंजन ने मामले की पूरी जानकारी जुटाने के लिए बिहार प्रदेश के महासचिव सागर कुमार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है।

पांच सदस्यीय कमेटी में कौन-कौन शामिल?

WJAI की ओर से गठित कमेटी में संगठन के प्रदेश और स्थानीय पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।

  • सागर कुमार – प्रदेश महासचिव, WJAI
  • रत्नेश कुमार – प्रदेश कोषाध्यक्ष
  • राजकमल – प्रदेश सचिव
  • आदित्य कुमार – प्रदेश संयुक्त सचिव
  • संजीव गुप्ता – सदस्य, सहरसा WJAI

यह कमेटी सहरसा सदर अस्पताल में हुई पूरी घटना से जुड़े तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों की जानकारी जुटाएगी।

मंत्री, DGP, DM और विधायक को सौंपा जाएगा ज्ञापन

WJAI के अनुसार, पांच सदस्यीय कमेटी घटना से जुड़े सभी तथ्यों की जानकारी लेने के बाद संबंधित विभाग के मंत्री, बिहार के डीजीपी, सहरसा के डीएम और स्थानीय विधायक को ज्ञापन सौंपेगी।

संगठन की ओर से घटना की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने की मांग की जाएगी। साथ ही जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की जाएगी।

पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान से समझौता नहीं: WJAI

WJAI ने कहा है कि संगठन पत्रकारों के सम्मान और सुरक्षा की गारंटी तथा उनके हक और अधिकार की लड़ाई के लिए हमेशा तत्पर है। संगठन के मुताबिक, पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।

संगठन ने यह भी कहा कि मामले में दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए वह लगातार प्रयास करेगा।

पहले अस्पताल प्रशासन भी रख चुका है अपना पक्ष

इससे पहले सहरसा सदर अस्पताल प्रशासन ने भी विवाद को लेकर अपना पक्ष रखा था। अस्पताल प्रशासन का आरोप है कि बच्चों के इलाज के दौरान कुछ पत्रकारों द्वारा बिना पूर्व अनुमति बच्चों और उनके परिजनों से बयान लेने का प्रयास किया गया, जिससे उपचार में परेशानी हो रही थी। अस्पताल प्रशासन ने विवाद के दौरान अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज, मारपीट और इमरजेंसी वार्ड के दरवाजे व शीशे को नुकसान पहुंचाने के आरोप भी लगाए थे।

अब पत्रकार संगठन द्वारा मामले में कमेटी गठित किए जाने के बाद विवाद की निष्पक्ष जांच की मांग और तेज होती दिख रही है। पूरे मामले में दोनों पक्षों के आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।