बाढ़ के बाद अब कटाव का खतरा! बिहार के सभी जिलों को सरकार का अलर्ट
Bihar Flood News: बिहार में बाढ़ का पानी अब धीरे-धीरे कम होने लगा है, लेकिन इसके साथ ही एक नई चुनौती सामने आ गई है। नदियों का जलस्तर घटने के दौरान तटों और तटबंधों पर कटाव का खतरा बढ़ने की आशंका है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग ने राज्य के सभी जिलों को विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को संवेदनशील इलाकों की लगातार निगरानी करने और कटाव के संकेत मिलते ही तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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पानी घटने के साथ क्यों बढ़ता है कटाव का खतरा?
जल संसाधन विभाग के अनुसार बाढ़ के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे की मिट्टी में पानी का दबाव बढ़ जाता है। इसके बाद जब जलस्तर तेजी से नीचे जाता है, तो कई जगहों पर नदी के किनारे की मिट्टी कमजोर हो जाती है। ऐसी स्थिति में अचानक तेज कटाव हो सकता है।
इससे नदी किनारे बसे गांवों, तटीय इलाकों और पहले से कमजोर तटबंधों के लिए खतरा बढ़ जाता है। इसी वजह से पानी कम होने के बावजूद संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी के निर्देश
जल संसाधन विभाग ने जिलों को भेजे अलर्ट में नदी के तटों, कटाव संभावित स्थानों और कमजोर तटबंधों पर विशेष नजर रखने को कहा है। अधिकारियों को संवेदनशील स्थलों पर लगातार पेट्रोलिंग और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
यदि किसी स्थान पर कटाव के संकेत दिखाई देते हैं तो तत्काल स्थल का निरीक्षण कर आवश्यक निरोधात्मक और सुरक्षात्मक कार्य शुरू करने को कहा गया है।
तट धंसने या धारा बदलने पर तुरंत कार्रवाई
सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि यदि कहीं अचानक तट धंसने, कटाव बढ़ने या नदी की धारा के तेजी से किनारे की ओर बढ़ने की सूचना मिलती है, तो इसमें किसी भी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
जरूरत के अनुसार मौके पर सुरक्षात्मक कार्य शुरू करने के साथ पर्याप्त संसाधन और आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखने को कहा गया है, ताकि आपात स्थिति में बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।
गंगा का जलस्तर घटा, गंडक और कोसी स्थिर
शनिवार शाम भागलपुर के सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर 36.80 मीटर दर्ज किया गया। यहां नदी के जलस्तर में गिरावट की प्रवृत्ति देखी जा रही है।
वहीं वाल्मीकिनगर बराज पर गंडक और वीरपुर बराज पर कोसी का जलस्तर स्थिर बताया गया है। दूसरी ओर, इंद्रपुरी बराज पर सोन नदी का पानी अभी भी बढ़ रहा है, जिससे संबंधित इलाकों में निगरानी जरूरी बनी हुई है।
कई नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर
बिहार की कई प्रमुख नदियां अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इनमें कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा शामिल हैं।
- बलतारा और कुरसेला में कोसी
- खगड़िया में बूढ़ी गंडक
- दीघा, गांधीघाट, हाथीदह, भागलपुर, कहलगांव और मुंगेर में गंगा
- श्रीपालपुर में पुनपुन
- बेनीबाद में बागमती
- दरौली और सिसवन में घाघरा
इन स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है।
15 जिलों में 48 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ प्रभावित
आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार बिहार के 15 जिलों में अब भी बाढ़ का असर बना हुआ है। इनमें पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अरवल शामिल हैं।
इन जिलों के 87 प्रखंडों की 574 ग्राम पंचायतों में करीब 48.22 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं।
1248 सामुदायिक रसोईघरों से पहुंच रहा भोजन
बाढ़ प्रभावित लोगों तक राहत और भोजन पहुंचाने के लिए 1248 सामुदायिक रसोईघर संचालित किए जा रहे हैं। अब तक करीब 82.19 लाख बाढ़ प्रभावित लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा चुका है।
वहीं, 13 राहत शिविरों में 12,260 लोगों के लिए रहने, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है।
राहत सामग्री और बचाव टीमों की तैनाती
बाढ़ प्रभावित इलाकों में अब तक करीब 3.53 लाख पॉलीथीन शीट, 59,500 ड्राई राशन पैकेट, 1400 फूड पैकेट और 11,424 क्विंटल पशुचारा वितरित किया गया है।
बचाव और राहत कार्यों के लिए 1794 सरकारी नावें संचालित की जा रही हैं। इसके अलावा एसडीआरएफ की 27 टीमें और एनडीआरएफ की 10 टीमें अलग-अलग जिलों में तैनात हैं।
पानी घटा, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं
बिहार में बाढ़ का पानी कम होने से लोगों को कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जलस्तर घटने के साथ कमजोर नदी तटों और तटबंधों पर कटाव की आशंका बढ़ गई है।
ऐसे में जल संसाधन विभाग ने जिलों को निर्देश दिया है कि कटाव की किसी भी आशंका को गंभीरता से लिया जाए और समय रहते सुरक्षात्मक कार्रवाई की जाए। नदी किनारे रहने वाले लोगों को भी प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए सतर्क रहने की जरूरत है।







