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AI से बदलेगा गांवों का भविष्य: खेती, पंचायत और शिक्षा में डिजिटल क्रांति की दस्तक

Bihar news: दिल्ली में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में बड़े करार, #AIforAll के तहत ग्रामीण भारत पर फोकस
 
AI से बदलेगा गांवों का भविष्य: खेती, पंचायत और शिक्षा में डिजिटल क्रांति की दस्तक
Bihar news: भारत के गांव अब सिर्फ विकास की चर्चा का विषय नहीं, बल्कि डिजिटल बदलाव की प्रयोगशाला बनते जा रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए सरकार ग्रामीण शासन, खेती, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देने में जुटी है। #AIforAll रणनीति के तहत एआई को समावेशी विकास का मजबूत आधार बनाया जा रहा है।

हाल ही में दिल्ली में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में कई अहम एमओयू पर हस्ताक्षर हुए, जिनका उद्देश्य एआई आधारित सेवाओं को दूरदराज के गांवों तक पहुंचाना है। बिहार ने भी इस दिशा में सक्रिय कदम बढ़ाए हैं।

पंचायतों में एआई की एंट्री

पंचायती राज मंत्रालय ने अगस्त 2025 में मिनिस्ट्री ऑफ़ पंचायती राज के तहत ‘सभासार’ नामक एआई टूल लॉन्च किया। यह ग्राम सभा और पंचायत बैठकों की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से स्वतः मिनट्स तैयार करता है।

इसे भाषिणी से जोड़ा गया है, जिससे यह 14 भारतीय भाषाओं में काम करता है। इससे दस्तावेजीकरण आसान हुआ है और पारदर्शिता बढ़ी है।

वहीं eGramSwaraj प्लेटफॉर्म के जरिए पंचायतों के बजट, भुगतान और लेखांकन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो चुकी है। 2025-26 तक यह 2.5 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों में लागू हो चुका है।

‘ग्राम मानचित्र’ जैसे जीआईएस टूल से परिसंपत्तियों की निगरानी और विकास योजनाओं की सटीक प्लानिंग संभव हो रही है।

एआई कोष और भूप्रहरी से पारदर्शिता

सरकार का AI Kosh प्लेटफॉर्म 20 उद्योगों में फैले 7,500 से अधिक डेटासेट और 273 एआई मॉडल उपलब्ध करा रहा है। फरवरी 2026 तक इसे 69 लाख से अधिक बार विजिट किया जा चुका है।

वहीं ‘भूप्रहरी’ एआई और जीआईएस तकनीक से मनरेगा परिसंपत्तियों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग कर रहा है, जिससे जवाबदेही और पारदर्शिता मजबूत हो रही है।

कृषि में एआई का नया दौर

किसानों के लिए ‘किसान ई-मित्र’ वर्चुअल असिस्टेंट सरकारी योजनाओं और सहायता की जानकारी देता है। राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली और फसल स्वास्थ्य मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म उपग्रह, मौसम और मिट्टी के डेटा के आधार पर रीयल-टाइम सलाह दे रहे हैं। इससे फसल उत्पादन बढ़ाने और नुकसान कम करने में मदद मिल रही है।

शिक्षा और कौशल में डिजिटल बढ़त

NCERT के DIKSHA प्लेटफॉर्म पर एआई आधारित वीडियो सर्च और रीड-अलाउड जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं, जो दिव्यांग छात्रों के लिए खासतौर पर उपयोगी हैं।

‘युवा’ कार्यक्रम के जरिए कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों को एआई और डिजिटल स्किल सिखाई जा रही है, ताकि वे भविष्य की तकनीकी दुनिया के लिए तैयार हो सकें।

भाषा की बाधा भी टूट रही

भाषिणी 36 से अधिक भारतीय भाषाओं में अनुवाद और वॉयस सेवाएं दे रहा है। यह 23 से अधिक सरकारी सेवाओं से जुड़ा है, जिससे कम पढ़े-लिखे ग्रामीणों के लिए डिजिटल सेवाएं आसान हुई हैं। अक्टूबर 2025 तक इसके 10 लाख से अधिक डाउनलोड दर्ज हो चुके हैं।

बदलती तस्वीर

एआई अब सिर्फ शहरों की तकनीक नहीं, बल्कि गांवों की ताकत बनता जा रहा है। पंचायत की बैठक से लेकर खेत की मेड़ और स्कूल की कक्षा तक, हर जगह डिजिटल बदलाव की बयार है। यदि यह रफ्तार बनी रही, तो आने वाले वर्षों में भारत का ग्रामीण परिदृश्य तकनीक के सहारे एक नई ऊंचाई पर नजर आएगा।