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कांटी की समस्याओं पर विधानसभा में गरजे अजीत कुमार: अंडरपास निर्माण पर रोक, स्वास्थ्य और शिक्षा मुद्दों पर सरकार से

 
कांटी की समस्याओं पर विधानसभा में गरजे अजीत कुमार: अंडरपास निर्माण पर रोक, स्वास्थ्य और शिक्षा मुद्दों पर सरकार से
Bihar news: Bihar Legislative Assembly में शुक्रवार को कांटी विधानसभा क्षेत्र की जमीनी समस्याएं जोरदार तरीके से उठीं। विधायक सह पूर्व मंत्री अजीत कुमार ने रेल अंडरपास निर्माण में अनियमितता, स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाल स्थिति और क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा संस्थान की कमी जैसे मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित कराया।

अंडरपास निर्माण पर लगी रोक

कांटी में बन रहे रेल अंडरपास के निर्माण कार्य में लापरवाही का आरोप लगाते हुए विधायक ने कहा कि निर्माण एजेंसी की मनमानी से आम लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। सर्विस रोड पर गड्ढों और अव्यवस्था के कारण आवागमन बाधित था। मामला सदन में उठते ही सरकार ने भवेश मिश्रा कंस्ट्रक्शन कंपनी के कार्य पर रोक लगाने की जानकारी दी। विभागीय मंत्री ने स्वीकार किया कि निर्माण में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं और आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

स्वास्थ्य केंद्रों की हालत पर सवाल

अजीत कुमार ने कांटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में जलजमाव और गंदगी की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। सरकार की ओर से जवाब दिया गया कि समस्या के समाधान के लिए बिहार चिकित्सा सेवाएं एवं आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड से प्रस्ताव मांगा गया है और जल्द सुधार कार्य शुरू होगा।

मड़वन प्रखंड के फंदा, मकदुमपुर और बड़कागांव गांवों में अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और वेलनेस सेंटर भवन निर्माण नहीं होने का मुद्दा भी सदन में गूंजा। विधायक ने कहा कि जमीन उपलब्ध होने के बावजूद भवन निर्माण नहीं होने से हजारों लोगों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है। इस पर मंत्री ने संबंधित जिलाधिकारी को मानक के अनुरूप भूमि उपलब्ध कराने का निर्देश देने और राशि मिलते ही स्वीकृति देने का आश्वासन दिया।

पॉलिटेक्निक कॉलेज की मांग

विधायक ने कांटी में पॉलिटेक्निक कॉलेज खोलने की मांग भी रखी। उनका कहना था कि तकनीकी शिक्षा संस्थान के अभाव में युवाओं को दूसरे जिलों का रुख करना पड़ता है। सरकार ने इस मांग को संज्ञान में लेकर सकारात्मक पहल का संकेत दिया।

आपको बता दें कि कांटी की बुनियादी समस्याओं को लेकर विधायक की सक्रियता का असर सदन में स्पष्ट दिखा। कई मामलों में सरकार को जवाब देना पड़ा और त्वरित कार्रवाई का भरोसा देना पड़ा।