किशनगंज में विकास के दावों के बीच दर्दनाक तस्वीर, जनाजे को कंधे पर लेकर नदी पार करने को मजबूर ग्रामीण
Kishanganj: बिहार के किशनगंज जिले से सामने आई एक तस्वीर बुनियादी सुविधाओं को लेकर किए जा रहे विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। बहादुरगंज प्रखंड के नोदिया टोली-बैसा घाट पर खकवा नदी के ऊपर पुल नहीं होने के कारण आसपास के कई गांवों के लोगों को आज भी नदी पार कर आवागमन करना पड़ता है। हालात इतने मुश्किल हैं कि किसी ग्रामीण की मौत होने पर उसके अंतिम संस्कार के लिए भी शव को नदी के पानी के बीच से ले जाना पड़ता है।
बरसात के दिनों में यह परेशानी और गंभीर हो जाती है। नदी का जलस्तर बढ़ने और पानी का बहाव तेज होने से लोगों के लिए इसे पार करना जोखिम भरा हो जाता है। इसके बावजूद ग्रामीणों के पास आवागमन का कोई आसान विकल्प उपलब्ध नहीं है।
जनाजे को कंधे पर लेकर नदी में उतरे लोग
हाल ही में सड़क हादसे में जान गंवाने वाली 20 वर्षीय शहनसवी बेगम, पिता सईदुर्रहमान, निवासी बीरपुर के शव को अंतिम संस्कार के लिए बैसा कब्रिस्तान ले जाना पड़ा। पुल नहीं होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों ने शव को कंधे पर उठाया और खकवा नदी के पानी से होकर दूसरी तरफ पहुंचे।
यह दृश्य इलाके की बदहाल कनेक्टिविटी की गंभीर तस्वीर पेश करता है। जिस रास्ते से रोजाना लोग अपने कामकाज के लिए गुजरते हैं, उसी रास्ते से ग्रामीणों को अपने किसी करीबी के अंतिम सफर में भी गुजरना पड़ता है।
हजारों लोगों के सामने रोज की परेशानी
स्थानीय लोगों के मुताबिक, नोदिया टोली-बैसा घाट के आसपास बसे दर्जनों गांवों के हजारों लोग इस समस्या से प्रभावित हैं। सामान्य दिनों में भी नदी पार करना आसान नहीं है। बारिश के मौसम में स्थिति और खराब हो जाती है।
महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए नदी पार करना विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण बताया जा रहा है। पानी का बहाव बढ़ने पर दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
कई बार उठी पुल बनाने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि खकवा नदी पर पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही है। इस संबंध में प्रशासन और संबंधित अधिकारियों तक कई बार बात पहुंचाई गई। स्थानीय स्तर पर स्थल निरीक्षण किए जाने की बात भी सामने आती रही है, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक अब तक पुल निर्माण को लेकर जमीन पर कोई ठोस बदलाव नहीं हुआ है।
हर बार लोगों को उम्मीद होती है कि जल्द ही उनकी समस्या का समाधान होगा, लेकिन समय बीतने के साथ हालात पहले जैसे ही बने हुए हैं।
डीएम से ग्रामीणों की सीधी मांग
ग्रामीणों की मांग किसी बड़े प्रोजेक्ट या विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि एक ऐसे पुल की है जो उन्हें सुरक्षित तरीके से मुख्य सड़क और आसपास के इलाकों से जोड़ सके। लोगों का कहना है कि कम से कम ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए कि किसी व्यक्ति की मौत के बाद उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए नदी के पानी से होकर ले जाना पड़े।
अब सवाल प्रशासन के सामने है कि नोदिया टोली-बैसा घाट पर पुल निर्माण की मांग कब पूरी होगी? क्या बरसात में नदी का बढ़ता जलस्तर किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या उससे पहले प्रशासन इस समस्या का स्थायी समाधान करेगा?
बहादुरगंज की यह तस्वीर सिर्फ एक पुल की कमी नहीं दिखाती, बल्कि उन हजारों लोगों की रोजमर्रा की मुश्किलों को सामने लाती है, जो आज भी एक सुरक्षित रास्ते के इंतजार में हैं।







