बिहार में शराबबंदी पर अनंत सिंह का बड़ा बयान, बोले- गांव वाले बनाएं टीम और शराब तस्करों पर रखें नजर; पुलिस को दें सूचना
Bihar News: बिहार में शराबबंदी लागू होने के बावजूद शराब की तस्करी और सेवन को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने इस समस्या से निपटने के लिए ग्रामीणों से सामूहिक रूप से आगे आने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गांव के लोगों को छोटे-छोटे समूह बनाकर शराब की तस्करी और सेवन करने वालों पर नजर रखनी चाहिए और इसकी जानकारी पुलिस को देनी चाहिए।
अनंत सिंह का यह बयान पटना जिले के बाढ़ थाना क्षेत्र के बेढ़ना गांव के सैदपुर टोला में हुई घटना के बाद सामने आया है, जहां कथित शराब पार्टी के दौरान चार लोगों की संदिग्ध मौत हो गई थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद विधायक पीड़ित परिवारों से मिलने गांव पहुंचे थे।
ग्रामीणों ने बताई शराब तस्करी की स्थिति
बेढ़ना गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने विधायक के सामने शराबबंदी के बावजूद शराब की कथित बिक्री और सेवन का मुद्दा उठाया। ग्रामीणों का दावा था कि गांव में शराब की तस्करी जारी है और बड़ी संख्या में लोग शराब का सेवन करते हैं।
ग्रामीणों ने यहां तक दावा किया कि गांव में करीब 60 से 70 फीसदी लोग शराब पीते हैं। उनका कहना था कि शराबबंदी का समर्थन करने वाले लोग जब शराब तस्करों या शराब पीने वालों का विरोध करते हैं तो कई बार उन्हें ही परेशानी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों की बात सुनने के बाद विधायक अनंत सिंह ने स्थिति को गंभीर और चिंताजनक बताया।
‘सिर्फ पुलिस के भरोसे नहीं रुक सकती शराब तस्करी’
अनंत सिंह ने कहा कि शराबबंदी को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी सिर्फ पुलिस और प्रशासन की नहीं हो सकती। ग्रामीणों को भी अपने स्तर पर जागरूक होकर सामूहिक जिम्मेदारी निभानी होगी।
उन्होंने ग्रामीणों को सुझाव दिया कि गांव में छोटे-छोटे समूह बनाए जाएं और शराब की बिक्री, तस्करी या सेवन से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखी जाए। ऐसी किसी भी गतिविधि की जानकारी पुलिस तक पहुंचाने की बात भी उन्होंने कही।
सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखने की मांग
विधायक ने यह भी कहा कि शराब तस्करी की जानकारी पुलिस को देने वाले ग्रामीणों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जानी चाहिए। उनका कहना है कि अगर सूचना देने वाले लोगों की पहचान सामने आएगी तो उन्हें दबाव या प्रताड़ना का सामना करना पड़ सकता है।
अनंत सिंह के मुताबिक, शराबबंदी को जमीन पर प्रभावी बनाने के लिए ग्रामीणों और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है। स्थानीय लोगों की मदद से तस्करी और अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सकता है।
ग्रामीणों ने पुलिस की कार्यशैली पर उठाए सवाल
वहीं, कुछ ग्रामीणों ने विधायक के सामने पुलिस की कार्यशैली को लेकर भी अपनी शिकायतें रखीं। ग्रामीणों का आरोप था कि उन्होंने पहले भी गांव में शराब तस्करी की जानकारी पुलिस को दी थी, लेकिन इसके बाद कथित तौर पर उन्हें ही परेशान किया गया।
ग्रामीणों ने दावा किया कि पुलिस और शराब तस्करों के बीच मिलीभगत के कारण शिकायत करने वालों को परेशानी उठानी पड़ी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पुलिस की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
शराबबंदी को लेकर फिर उठे सवाल
बेढ़ना गांव की घटना और उसके बाद सामने आए ग्रामीणों के दावों ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी के जमीनी क्रियान्वयन को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विधायक अनंत सिंह ने जहां ग्रामीणों से सामूहिक रूप से आगे आने की अपील की है, वहीं अब निगाहें इस बात पर हैं कि स्थानीय प्रशासन शराब की कथित तस्करी और सेवन पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाता है।







