Newshaat_Logo

अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी का लोगो जारी, जानिए क्या है इसमें खास

 
अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी का लोगो जारी, जानिए क्या है इसमें खास

NewsHaat Desk: विश्व हिन्दू परिषद ने श्रद्धेय अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी वर्ष के लिए विशेष लोगो जारी किया है। विहिप के अंतर्राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने बुधवार को लोगो जारी करते हुए कहा कि इसमें अशोक सिंहल के आध्यात्मिक संस्कार, हिंदू समाज के गौरव-जागरण और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके योगदान को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाया गया है।

अशोक सिंहल का जन्म 27 सितंबर 1926 को हुआ था। वर्ष 2026 में उनकी जन्म शताब्दी पूरी होने के अवसर पर जारी यह लोगो उनके जीवन, विचारों और कार्यों को स्मरण करने के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

भगवा रंग से लेकर श्रीराम मंदिर तक, हर प्रतीक का खास अर्थ

लोगो की भगवा-केसरिया पृष्ठभूमि को त्याग, तपस्या, आध्यात्मिक चेतना, शौर्य और राष्ट्रधर्म के प्रति समर्पण का प्रतीक बताया गया है। इसके चारों ओर बना स्वर्णिम वलय भारतीय ज्ञान परंपरा की निरंतरता, गौरव और प्रकाश को दर्शाता है।

लोगो में श्रीराम मंदिर और भगवा ध्वज को भी प्रमुख स्थान दिया गया है। विहिप के मुताबिक, श्रीराम मंदिर अशोक सिंहल के जीवन के प्रमुख ध्येय और श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में उनकी भूमिका का प्रतीक है। वहीं भगवा ध्वज को सनातन परंपरा, संगठन, त्याग और सांस्कृतिक स्वाभिमान से जोड़ा गया है।

अशोक सिंहल के व्यक्तित्व को भी मिली जगह

लोगो के केंद्र में अशोक सिंहल का शांत और सौम्य व्यक्तित्व दिखाई देता है। बजरंग लाल बागड़ा के अनुसार, यह उनके आध्यात्मिक संस्कार, दृढ़ संकल्प, संगठन क्षमता और संतों के प्रति श्रद्धा को दर्शाता है।

लोगो में उनका तिलक और सफेद वस्त्र सादगी तथा आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक बताया गया है। वहीं नाम को उभारता गहरा लाल-मरून रंग ऊर्जा, साहस और संकल्प का भाव प्रस्तुत करता है। नीचे दिया गया पीताभ-सुनहरा आधार ज्ञान, प्रकाश, मंगल और भविष्य की आशा का संकेत माना गया है।

कार्यक्रमों और डिजिटल माध्यमों में इस्तेमाल होगा लोगो

विहिप के अनुसार, यह लोगो जन्म शताब्दी वर्ष के दौरान विभिन्न कार्यक्रमों, प्रकाशनों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, स्मृति अभियानों और जनसंपर्क गतिविधियों में इस्तेमाल किया जाएगा।

बजरंग लाल बागड़ा ने कहा कि यह केवल एक दृश्य-चिह्न नहीं है, बल्कि अशोक सिंहल के जीवन और उनके कार्यों से जुड़े संदेशों का प्रतीकात्मक रूप है। जन्म शताब्दी वर्ष को उनके योगदान के स्मरण के साथ सेवा, संगठन, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना से जुड़े संकल्पों को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में मनाया जाएगा।