बेतिया में आयुष डॉक्टरों का विरोध: ‘डिग्रीधारी को झोलाछाप बताकर कार्रवाई बंद हो’, DM को सौंपा ज्ञापन
जिले के आयुष चिकित्सकों का कहना है कि वे विधिवत डिग्रीधारी हैं और कई डॉक्टर निजी प्रैक्टिस के साथ-साथ सरकारी अस्पतालों में भी सेवाएं दे रहे हैं, इसके बावजूद उन्हें “झोलाछाप” बताकर स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार छापेमारी कर रही है और प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।
NIMA के नॉर्थ बिहार सचिव डॉ. मो. अब्दुल खबीर ने बताया कि संगठन फर्जी और बिना डिग्री वाले चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई का पूरी तरह समर्थन करता है, लेकिन रजिस्टर्ड आयुष डॉक्टरों को टारगेट करना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के नाम पर योग्य चिकित्सकों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
चिकित्सकों ने यह भी मुद्दा उठाया कि प्रशासन द्वारा उन्हें एलोपैथिक इलाज से रोका जाता है, जबकि केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय के तहत इंटीग्रेटेड मेडिसिन के जरिए मरीजों का उपचार करने की अनुमति है। इसके बावजूद उन पर कार्रवाई की धमकी दी जाती है।
हालांकि, प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद जिला पदाधिकारी ने आयुष चिकित्सकों को आश्वस्त किया कि पंजीकृत डॉक्टरों के खिलाफ किसी प्रकार की अनुचित कार्रवाई नहीं की जाएगी।
फिलहाल, इस पूरे मामले ने जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक कार्रवाई के तरीके पर एक नई बहस छेड़ दी है।







