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बांकीपुर उपचुनाव बना प्रतिष्ठा की जंग! BJP, RJD और जन सुराज के बीच कांटे की टक्कर, 30 जुलाई को वोटिंग

 
बांकीपुर उपचुनाव बना प्रतिष्ठा की जंग! BJP, RJD और जन सुराज के बीच कांटे की टक्कर, 30 जुलाई को वोटिंग

 

Bihar news: बिहार की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब पूरी तरह राजनीतिक मुकाबले में बदल चुका है। भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और जन सुराज ने अपने-अपने उम्मीदवारों के साथ चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंक दी है। ऐसे में यह उपचुनाव अब केवल एक सीट तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि सभी दलों की राजनीतिक साख की परीक्षा बन गया है। इस सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा, जबकि 3 अगस्त को मतगणना के बाद नतीजे घोषित किए जाएंगे।

भाजपा ने पूर्व विधायक और वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई सीट पर उनके करीबी माने जाने वाले अभिषेक कुमार सिन्हा उर्फ बंटी को उम्मीदवार बनाया है। पार्टी का मानना है कि अभिषेक स्थानीय संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं और नितिन नवीन की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सक्षम हैं। इसी रणनीति के तहत भाजपा अपने पारंपरिक वोट बैंक और संगठनात्मक मजबूती को बरकरार रखने की कोशिश में जुटी है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कायस्थ समुदाय के मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अभिषेक सिन्हा भी इसी समाज से आते हैं, इसलिए भाजपा को जातीय समीकरणों का भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

वहीं, महागठबंधन की ओर से राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा गुप्ता को चुनावी मैदान में उतारा है। कारोबारी पृष्ठभूमि से आने वाली रेखा गुप्ता वैश्य समाज का प्रतिनिधित्व करती हैं। आरजेडी उन्हें सामाजिक समीकरण और विपक्षी एकजुटता के आधार पर मजबूत चुनौती के रूप में पेश कर रही है।

इधर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने भी इस उपचुनाव को अपनी राजनीतिक प्रतिष्ठा से जोड़ दिया है। उनके मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय और पहले से अधिक दिलचस्प हो गया है। जन सुराज इस चुनाव को बिहार की वैकल्पिक राजनीति के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रही है।

चुनावी माहौल को और गर्माते हुए तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पटना साहिब से दो बार सांसद रह चुके शत्रुघ्न सिन्हा ने भी प्रशांत किशोर का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर ने चुनावी माहौल में नई ऊर्जा पैदा की है और मतदाताओं से उनके पक्ष में मतदान करने की अपील की।

अब बांकीपुर का उपचुनाव केवल विधायक चुनने की प्रक्रिया नहीं रह गया है। यह चुनाव भाजपा के गढ़ को बचाने, आरजेडी की वापसी की कोशिश और जन सुराज की राजनीतिक ताकत की पहली बड़ी परीक्षा बन चुका है। ऐसे में पूरे बिहार की निगाहें अब 30 जुलाई की वोटिंग और 3 अगस्त को आने वाले चुनाव परिणाम पर टिकी हैं।